ड्रिप एरिगेशन से खड़गांव छात्रावास में हरियाली, किचन गार्डन से मिल रही ताजी सब्जियाँ

मोहला, 13 जनवरी 2026/sns/- आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास, खड़गांव आज आधुनिक कृषि नवाचार का एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है। सीमित संसाधनों के बावजूद छात्रावास परिसर में विकसित किचन गार्डन न केवल बच्चों को ताजी हरी सब्जियाँ उपलब्ध करा रहा है, बल्कि प्रकृति के प्रति जैविक कृषि के लिए भी प्रेरित कर रहा हैं। वर्ष 2018 तक यह छात्रावास पुराने प्राथमिक शाला भवन में संचालित हो रहा था। वर्ष 2019 में नवीन छात्रावास भवन का निर्माण होने के पश्चात परिसर में पर्याप्त खाली भूमि उपलब्ध हुई। इसका सदुपयोग करते हुए छात्रावास अधीक्षक श्री रविंद्र कुमार मण्डले एवं संस्था के स्टाफ के सहयोग से खाली भूमि में एक छोटा सा गार्डन विकसित किया गया। आज इस गार्डन में मौसमी एवं बारहमासी फूल छात्रावास की सुंदरता बढ़ा रहे हैं। यह क्षेत्र वनांचल होने के कारण यहाँ हरी सब्जियों की उपलब्धता सीमित रहती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए छात्रावास परिसर में ड्रिप एरिगेशन एवं मल्चिंग पद्धति जैसी आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रयोग कर एक सुव्यवस्थित एवं आकर्षक किचन गार्डन तैयार किया गया। इसके माध्यम से वर्ष भर छात्रावास में निवासरत बच्चों को ताजी एवं पौष्टिक हरी सब्जियाँ उपलब्ध हो रही हैं। किचन गार्डन के अनेक सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। एक ओर जहाँ छात्रावास परिसर हरा-भरा और मनमोहक बन गया है, वहीं दूसरी ओर छात्रों में श्रम, अनुशासन एवं पर्यावरण के प्रति प्रेम की भावना विकसित हो रही है। छात्र स्वयं प्रत्येक रविवार को श्रमदान के माध्यम से गार्डन की देखरेख करते हैं। इस कार्य में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहता है। छात्रावास में आने वाले पालक भी इस आधुनिक कृषि पद्धति को देखकर अत्यंत प्रसन्न होते हैं तथा वे स्वयं भी अपने खेतों में ड्रिप एरिगेशन एवं मल्चिंग तकनीक अपनाने हेतु प्रेरित हो रहे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद कर्मचारियों के नवाचार और समर्पण से यह किचन गार्डन आज सफलता की कहानी बंया कर रही हैं। यह पहल न केवल छात्रावास की आत्मनिर्भरता को दर्शाती है, बल्कि आदिवासी विकास विभाग एवं जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का सशक्त उदाहरण भी प्रस्तुत करती है।

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