बस्तर में मानसिक स्वास्थ्य हेतु अंतर-विभागीय दृष्टिकोण की आवश्यकता पर हुई कार्यशाला
जगदलपुर, 07 अप्रैल 2026/sns/-कलेक्टोरेट में मंगलवार को मानसिक स्वास्थ्य और मनो सामाजिक कल्याण पर कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें जिले के विभिन्न विभागों के लगभग 40 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। यह सत्र मनो बस्तर पहल के अंतर्गत जिला प्रशासन और मरीवाला हेल्थ इनिशिएटिव के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य बस्तर जिले के आवासीय संस्थानों में रहने वाले जनजातीय बच्चों के लिए मानसिक स्वास्थ्य समर्थन और आत्महत्या रोकथाम के लिए संस्थागत तैयारियों को मजबूत करना था।
कार्यशाला का संचालन डॉ. अचल भगत ने किया, जिन्होंने मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण पर एक समग्र (इंटरसेक्शनल) दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। डॉ. भगत अपोलो हॉस्पिटल्स में वरिष्ठ मनोचिकित्सक हैं, जो सार्थक मेंटल हेल्थ नामक एक गैर-लाभकारी संस्था के अध्यक्ष भी हैं और एक सक्रिय मानसिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता भी हैं, जिन्हें सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य और जनसंपर्क के क्षेत्र में व्यापक अनुभव है। सत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित होता है, और इन चुनौतियों से निपटने के लिए विभिन्न विभागों के बीच सहयोग आवश्यक है।
प्रतिभागियों ने आवासीय संस्थानों में रहने वाले बच्चों की दैनिक परिस्थितियों पर चर्चा की और इस बात पर प्रकाश डाला कि पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पानी और मनोरंजक गतिविधियों तक पहुँच उनके मानसिक स्वास्थ्य को किस प्रकार प्रभावित करती है। कार्यशाला का मुख्य संदेश यह था कि विभागों के अधिकारी अपने मौजूदा कार्यों में मानसिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण को शामिल करें।
कार्यशाला में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री प्रतीक जैन और सहायक कलेक्टर श्री विपिन दुबे भी मौजूद रहे। साथ ही जिले के विभिन्न आवासीय संस्थानों के साथ सीधे काम करने वाले ब्लॉक स्तर के समन्वयकों ने भी कार्यशाला में भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए। चर्चा और अनुभवों के आदान-प्रदान के माध्यम से इस कार्यशाला ने बस्तर में जनजातीय बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के समर्थन के लिए एक समन्वित और प्रणालीगत दृष्टिकोण की आवश्यकता को रेखांकित किया।
यह कार्यशाला मनो बस्तर पहल के अंतर्गत क्षेत्र के आवासीय संस्थानों में रहने वाले जनजातीय बच्चों के लिए मानसिक स्वास्थ्य प्रणाली और आत्महत्या रोकथाम प्रयासों को सुदृढ़ करने की दिशा में चल रहे कार्यों का हिस्सा है।