अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना से सामाजिक समरसता को बढ़ावा
राजनांदगांव, 11 अप्रैल 2026/sns/- छत्तीसगढ़ शासन की अस्पृश्यता निवारणार्थ अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना नियम 1978 (यथा संशोधित 2019) समाज में समरसता एवं समानता को बढ़ावा देने की दिशा में प्रभावी साबित हो रही है। योजना का मुख्य उद्देश्य गैर अनुसूचित जाति युवक या युवती द्वारा अनुसूचित जाति के युवती या युवक के मध्य विवाह को प्रोत्साहित कर अस्पृश्यता उन्मूलन की दिशा में सकारात्मक पहल को सम्मानित करना है। योजना के अंतर्गत पात्र अंतर्जातीय दम्पत्तियों को 2 लाख 50 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि एवं प्रशंसा पत्र प्रदान किया जाता है।
अपर कलेक्टर एवं जिला विवाह अधिकारी श्री सीएल मारकण्डेय ने बताया कि राजनांदगांव जिले में पिछले तीन वर्षों में इस योजना के तहत कुल 151 दम्पत्तियों को 3 करोड़ 77 लाख 50 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। वर्षवार आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में 59 हितग्राहियों को 1 करोड़ 47 लाख 50 हजार रुपए, वर्ष 2024-25 में 54 हितग्राहियों को 1 करोड़ 35 लाख रूपए तथा वर्ष 2025-26 में 38 हितग्राहियों को 95 लाख रूपए का भुगतान किया गया है। योजना के तहत पात्रता के लिए विवाह का पंजीयन हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 के अंतर्गत अनिवार्य है तथा आवेदन विवाह की तिथि से एक वर्ष के भीतर प्रस्तुत करना होता है। दम्पत्तियों की आयु निर्धारित सीमा के अंतर्गत होना आवश्यक है तथा द्वितीय विवाह की स्थिति में सामान्यत: लाभ देय नहीं होता, जबकि विधवा पुनर्विवाह के मामलों में पात्रता निर्धारित शर्तों के अनुसार मान्य है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु जिला स्तर पर समिति गठित की गई है, जो प्राप्त आवेदनों की जांच कर स्वीकृति प्रदान करती है। कलेक्टर इस योजना के तहत प्रोत्साहन राशि स्वीकृत करने के लिए सक्षम प्राधिकारी हैं। यह योजना न केवल अंतर्जातीय विवाह को प्रोत्साहित कर रही है, बल्कि समाज में समानता, आपसी सम्मान एवं सामाजिक एकता को भी मजबूत कर रही है।