सुशासन तिहार 2026 वैज्ञानिक खेती की ओर बढ़े मानपुर के किसान मिट्टी परीक्षण से बढ़ेगी पैदावार
अम्बिकापुर 07 मई 2026/sns/- छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मनाए जा रहे ’सुशासन तिहार’ के तहत जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक खेती से जोड़ने के प्रयास रंग ला रहे हैं। सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मानपुर निवासी किसान श्री लालजी यादव अब अपनी खेती की पद्धति में बड़ा बदलाव ला रहे हैं। कृषि विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी जमीन की मिट्टी का परीक्षण कराया है, जिससे अब वे संतुलित खाद का उपयोग कर अपनी फसल की लागत कम और उत्पादन अधिक कर सकेंगे।
अधिकारियों का मार्गदर्शन और नई पद्धति का मेल
अपनी खुशी साझा करते हुए किसान लालजी यादव ने बताया कि वे अब खेती की नई पद्धतियों को अपना रहे हैं। उन्होंने कहा, हमारे क्षेत्र के कृषि अधिकारी और कर्मचारी खेतों तक पहुँच रहे हैं और हमें बेहतर खेती के लिए निरंतर मार्गदर्शन दे रहे हैं। उनके बताए अनुसार हमने मिट्टी परीक्षण कराया है। इससे अब मुझे यह सटीक जानकारी मिल सकेगी कि मेरे खेत की मिट्टी में कौन से पोषक तत्व की कमी है और मुझे कितनी मात्रा में खाद डालना है।
लागत में कमी और बेहतर मृदा स्वास्थ्य
मिट्टी परीक्षण की सुविधा से किसान अब अंधाधुंध रासायनिक खादों के प्रयोग से बच सकेंगे। श्री यादव ने बताया कि शासन की इस पहल से उन्हें बहुत सुविधा मिली है। अब वे वैज्ञानिक अनुशंसा के आधार पर ही उर्वरकों का चयन करेंगे, जिससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रहेगी, बल्कि खेती की लागत में भी कमी आएगी।
मुख्यमंत्री को दिया धन्यवाद
किसानों के द्वार तक शासन की योजनाओं को पहुँचाने के लिए लालजी यादव ने राज्य सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा, मैं छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूँ, जो अधिकारियों और कर्मचारियों को सीधे हम किसानों के पास भेज रहे हैं। सुशासन तिहार के माध्यम से हमें जो सहयोग मिल रहा है, वह सराहनीय है।
सुशासन से सशक्त हो रहे अन्नदाता
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशन एवं कलेक्टर के नेतृत्व में जिले के विभिन्न विकासखंडों में शिविरों का आयोजन कर किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) और उन्नत कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। शासन का मुख्य लक्ष्य है कि ‘गाँव-गाँव द्वार-द्वार’ पहुँचकर किसानों को सशक्त बनाया जाए, ताकि वे पारंपरिक खेती के साथ-साथ वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर आर्थिक रूप से समृद्ध हो सकें।