दलहन, तिलहन, मक्का एवं कोदो की खेती पर मिलेगी प्रति एकड़ 15 हजार रूपए आदान सहायता

बलौदाबाजार, 18 जून 2026/sns/- मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय  ने राज्य के कृषि परिदृश्य को बदलने और किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए कृषक उन्नति योजना के नवीन स्वरूप को मंजूरी दी है। इस ऐतिहासिक नीति के तहत, अब खरीफ सीजन से परंपरागत धान की खेती छोड़कर वैकल्पिक फसलें उगाने वाले किसानों को 15 हजार रुपए प्रति एकड़ की इनपुट सहायता (आदान प्रोत्साहन राशि) प्रदान की जाएगी। सरकार का यह कदम धान पर राज्य की पारंपरिक निर्भरता को कम करने, जल संकट से निपटने और भूमि की सेहत सुधारने की दिशा में एक क्रांतिकारी शुरुआत माना जा रहा है।

*दलहन, तिलहन और मिलेट्स पर विशेष जोर*:-

विभाग के अनुसार यदि कोई कृषक अपने पंजीकृत रकबे में धान के स्थान पर कम पानी वाली और उच्च मूल्य वाली फसलों का चयन करता है, तो उसे योजना का सीधा लाभ मिलेगा।शामिल की गई प्रमुख फसलें  अरहर, उड़द, मूंग,सोयाबीन, मूंगफली, तिल, कोदो, कुटकी, रागी (मोटा अनाज), -मक्का और कपास हैं।

सरकार ने योजना में पारदर्शिता और वास्तविक किसानों तक लाभ पहुंचाने के लिए अत्याधुनिक डिजिटल तंत्र को अनिवार्य किया है।  एकीकृत किसान पोर्टल सभी इच्छुक किसानों को तय समय-सीमा के भीतर इस पोर्टल पर अपनी भूमि और प्रस्तावित फसल का ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा।डिजिटल फसल सर्वेक्षण राजस्व और कृषि विभाग द्वारा सेटेलाइट या गिरदावरी (भौतिक सत्यापन) के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसान ने वास्तव में धान के बदले स्वीकृत फसल ही बोई है। एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीकृत ऐसे समस्त कृषक जो विगत खरीफ में धान फसल की खेती किये थे, जिन्होने आगामी खरीफ में धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसल लेने हेतु पंजीयन कराया हो। विधिक व्यक्तियों यथा ट्रस्ट,मण्डल,प्राईवेट लिमिटेड कम्पनी, शाला विकास समिति,केन्द्र,राज्य शासन की संस्थान,महाविद्यालय आदि समस्थाओं को योजना से लाभ लेने की पात्रता नहीं होगी।

पूर्व से ही खरीफ में दलहन, तिलहन, मक्का, कोदा, कुटकी, रागी और कपास की फसल लेने वाले कृषकों को एकीकृत किसान पोर्टल तथा एग्रीस्टेक पर पंजीयन एवं डिजिटल क्रॉप सर्वे में रकबे की पुष्टि उपरांत मान्य रकबे पर पूर्ववत् राशि रुपये 10000-प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान की जावेगी।
किसानों और राज्य की अर्थव्यवस्था को मिलने वाले बहुआयामी लाभ लागत की प्रतिपूर्ति रुपये 15,000 प्रति एकड़ की यह बड़ी राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी, जिससे वे उत्तम बीज और आधुनिक कीटनाशक खरीद सकेंगे।

इस योजना का लाभ जिले के सभी छोटे-बड़े और सीमांत किसानों को मिलेगा, बशर्ते उनकी भूमि का वैध रिकॉर्ड दर्ज हो। आधार कार्ड, भूमि की खसरा नकल (बी-1 और पी-2), बैंक पासबुक (जिसमें डीबीटी सक्रिय हो) और चालू मोबाइल नंबर पंजीयन हेतु किसान अपने नजदीकी प्राथमिक कृषि सहकारी समिति (सैलरी सोसायटी), ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, या विकासखण्ड कृषि कार्यालय से संपर्क कर अपनी फसल प्रविष्टि में संशोधन करवा सकते हैं।

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