महतारी वंदन योजना से रेड्डीपाल की महिलाओं को मिला संबल
सुकमा, 19 जून 2026/sns/- छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का दूरस्थ गाँव रेड्डीपाल आज एक बड़े बदलाव का गवाह बन रहा है। कभी नक्सल साये में जीने वाले इस गाँव में अब डर की जगह विकास और खुशहाली की चर्चाएँ होती हैं। शुक्रवार को गाँव में इमली के पेड़ के नीचे बैठकर टोरा (महुआ का फल) तोड़ती महिलाओं का एक बेहद खूबसूरत और सुकून देने वाला नजारा सामने आया। यहाँ गंगी, सोमरी, देवे, बंडी और सायमनी जैसी ग्रामीण महिलाएँ आपस में मिलकर न सिर्फ टोरा साफ कर रही थीं, बल्कि गाँव की बिजली, पानी और स्वच्छता जैसी मूलभूत सुविधाओं पर खुलकर चर्चा भी कर रही थीं। जंगलों पर आश्रित रहने वाले इन ग्रामीणों के जीवन में यह सकारात्मक बदलाव राज्य सरकार की “महतारी वंदन योजना“ की बदौलत आया है, जो इनके आर्थिक सशक्तिकरण का एक मजबूत जरिया बन चुकी है।
महतारी वंदन योजना ने गाँव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनके संकल्पों को नए पंख दिए हैं। गाँव की ही निवासी श्रीमती देवे इस बदलाव की एक जीती-जागती मिसाल हैं। देवे को हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता राशि ने उनके घर की माली हालत को संबल दिया है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे पक्के हों, तो सरकारी मदद से जीवन की दिशा बदली जा सकती है। देवे इस राशि का उपयोग अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए कर रही हैं, ताकि उनके बच्चों का भविष्य उज्जवल हो सके। इस अतिरिक्त आय से न केवल बच्चों की शिक्षा बेहतर हो रही है, बल्कि परिवार के खान-पान और पोषण के स्तर में भी बड़ा सुधार आया है।
इसी गाँव की एक और हितग्राही श्रीमती बंडी इस योजना को अपने घर का एक मजबूत सहारा मानती हैं। वे बताती हैं कि बाजार-हाट करने और तेल-राशन जैसी रोजमर्रा की घरेलू जरूरतों को पूरा करने में यह राशि बेहद उपयोगी साबित हो रही है। अब उन्हें छोटी-मोटी जरूरतों के लिए किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता। अपनी इस नई आत्मनिर्भरता और जीवन में आए सुखद बदलाव से गदगद होकर बंडी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया है। अब वे अपने क्षेत्र की दूसरी महिलाओं को भी इस राशि का सही उपयोग कर आर्थिक रूप से सबल बनने की प्रेरणा दे रही हैं।