पीएम मातृ वंदना योजना बनी शैला की ताकत सुदूर गांव में सुरक्षित मातृत्व की लिखी नई कहानी


बीजापुर, 19 जून 2026/sns/- जिले के सुदूरवर्ती ग्राम गोटाईगुड़ा, सेक्टर भोपालपटनम की निवासी श्रीमती शैला सोडांदी की कहानी प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) के प्रभावी क्रियान्वयन और जमीनी स्तर पर कार्यरत आंगनबाड़ी एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की समर्पित सेवाओं का प्रेरणादायक उदाहरण है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बीच इस योजना ने शैला को न केवल आर्थिक सहायता प्रदान की, बल्कि सुरक्षित मातृत्व की दिशा में आत्मविश्वास और संबल भी दिया।

खेती-किसानी और दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर शैला सोडांदी के लिए गर्भावस्था का समय कई चुनौतियों से भरा था। आर्थिक सीमाएं, स्वास्थ्य सुविधाओं की दूरी और पर्याप्त जानकारी का अभाव उन्हें चिंता में डाल रहा था। ऐसे समय में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और मितानिन उनके लिए पहली मददगार बनकर सामने आए। गर्भावस्था की जानकारी मिलते ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने शैला से संपर्क कर उन्हें प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की जानकारी दी और तत्काल पीएमएमवीवाई पोर्टल पर उनका पंजीयन कराया। इसके बाद नियमित गृह भेंट के माध्यम से उन्हें संतुलित आहार, स्वच्छता, टीकाकरण, प्रसव पूर्व जांच और सुरक्षित मातृत्व से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।

मार्गदर्शन का सकारात्मक प्रभाव यह हुआ कि शैला ने आयरन-फोलिक एसिड की गोलियों का नियमित सेवन शुरू किया और अपने दैनिक भोजन में दाल, हरी सब्जियां, दूध एवं मौसमी फलों को शामिल किया। पर्याप्त आराम और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों को अपनाने से उनके स्वास्थ्य में लगातार सुधार हुआ। परिवार के सदस्यों ने भी इस दौरान उनका पूरा सहयोग किया, जिससे उन्हें मानसिक और शारीरिक संबल मिला।

समय पूर्ण होने पर शैला का शासकीय स्वास्थ्य केंद्र में सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराया गया, जहां उन्होंने 2.8 किलोग्राम वजन की स्वस्थ बालिका को जन्म दिया। मां और नवजात दोनों के स्वस्थ होने से परिवार में खुशी का माहौल बन गया। प्रसव के उपरांत शैला को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत 6 हजार रुपये की मातृत्व सहायता राशि प्राप्त हुई। इस राशि का उपयोग उन्होंने पौष्टिक आहार, आवश्यक दवाइयों तथा नवजात शिशु के लिए वस्त्र, कंबल एवं अन्य जरूरी सामग्री खरीदने में किया। अपना अनुभव साझा करते हुए शैला सोडांदी कहती हैं, पहले मुझे गर्भावस्था के दौरान पोषण और देखभाल की सही जानकारी नहीं थी। आंगनबाड़ी दीदी और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से मुझे उचित मार्गदर्शन मिला। आज मैं और मेरी बेटी दोनों स्वस्थ हैं। अब मैं अपने गांव की अन्य महिलाओं को भी नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित करती हूं।

शैला सोडांदी की सफलता की यह कहानी दर्शाती है कि शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, समय पर मार्गदर्शन और सामुदायिक सहभागिता सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में भी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने और महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है।ष्हर गर्भवती महिला तक समय पर जानकारी, पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हमारा संकल्प है। शैला सोडांदी जैसी महिलाएं इस संकल्प की जीवंत मिसाल हैं।

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