विष्णुदेव साय सरकार ने किसानों को दी आर्थिक आजादी कोयाबेकुर नहर पुनर्जीवित
सुकमा, 18 जूलाई 2026/sns/-जिले के कोयाबेकुर और गोलाबेकुर क्षेत्र के किसानों का चार दशक पुराना इंतजार आखिरकार समाप्त हो गया है। वर्षों तक उपेक्षा, पानी की कमी और विषम परिस्थितियों का सामना करने वाले आदिवासी किसानों के खेतों तक अब कोयाबेकुर व्यपवर्तन योजना की नहरों से पानी पहुंचने लगा है। राज्य सरकार के प्रभावी प्रयासों और संवेदनशील प्रशासनिक पहल के चलते जीर्ण-शीर्ण पड़ी नहर का कायाकल्प हुआ है, जिससे क्षेत्र के 100 से अधिक किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। अब किसान धान के साथ-साथ नकदी फसलों की खेती कर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे। विगत दिनों कलेक्टर श्री अमित कुमार ने कोयाबेकुर व्यपवर्तन योजना का फील्ड भ्रमण कर आवश्यक निर्देश दिए थे।
साल 1983 में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी परियोजना का सपना लंबे समय तक अधूरा रहा। रखरखाव के अभाव और नक्सल प्रभावित परिस्थितियों के कारण नहर वर्षों तक बंद पड़ी रही, जिससे किसान केवल बारिश पर निर्भर रहने या महंगे बोरवेल से सिंचाई करने को मजबूर थे। सिंचाई विभाग के कार्यपालन अभियंता श्री शांतनु विश्वास ने बताया कि कोयाबेकुर व्यपवर्तन परियोजना के लिए वर्ष 2023 में प्रशासन से 187.22 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में वर्ष 2024 से नहर के व्यापक जीर्णाेद्धार का कार्य शुरू किया गया। 2.74 किलोमीटर लंबी नहर की सीसी लाइनिंग और आधुनिक संरचनाओं के निर्माण के साथ इसे नए स्वरूप में विकसित किया गया।
राज्य सरकार की विकासोन्मुखी सोच और प्रशासन की सतत निगरानी के परिणामस्वरूप जून 2026 में नहर के अंतिम छोर तक पानी पहुंचा, जिससे वर्षों से सूखे खेतों में फिर हरियाली की उम्मीद जागी है। 160 हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई क्षमता वाली इस परियोजना से किसानों को खरीफ के साथ-साथ गर्मी के मौसम में भी सुरक्षित और लाभकारी खेती का अवसर मिलेगा। यह उपलब्धि केवल सिंचाई सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि सुदूर अंचल में विकास, विश्वास और समृद्धि के नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक भी है।’कलेक्टर श्री अमित कुमार ने बताया कि कोयाबेकुर व्यपवर्तन योजना का पुनर्जीवन सुकमा के किसानों के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में वर्षों से लंबित इस परियोजना को समयबद्ध ढंग से पूरा किया गया है। इससे 100 से अधिक किसानों को नियमित सिंचाई सुविधा मिलेगी, 160 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों की आय और कृषि उत्पादकता में वृद्धि होगी।हम और अधिक किसानों तक नहर का लाभ पहुंचाने के लिए नहर विस्तार की कार्ययोजना पर कार्य कर रहे हैं।
किसान श्री संपत यादव ने बताया कि साल 1983 में जब यह नहर बनी थी, तब हम बहुत छोटे थे। कुछ दिन पानी आया और फिर दशकों तक यह नहर सूखी और बर्बाद पड़ी रही। अब नहर के पुनर्जीवन से हम गर्मी में भी सुरक्षित खेती कर पाएंगे, हमारी लागत कम होगी और कमाई बढ़ेगी। इस नई उम्मीद के लिए हम सरकार के दिल से आभारी हैं।
किसान मुकेश कुमार सोड़ी ने बताया कि वर्षों से बंद पड़ी गोल्लाबेकुर नहर के पुनर्जीवित होने से पूरे गांव के किसानों में खुशी का माहौल है। अब खेतों तक नहर का पानी पहुंचने से सिंचाई आसान होगी, जिससे फसलों का उत्पादन बढ़ेगा और किसानों को लाभ मिलेगा। इस महत्वपूर्ण पहल के लिए मैं एवं समस्त ग्रामवासी मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।
नहर में पानी पहुंचने के बाद किसान श्री संपत यादव, श्री मुकेश सोड़ी सहित क्षेत्र के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है। किसानों का मानना है कि इस पहल से खेती की लागत में कमी आएगी, उत्पादन बढ़ेगा और परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। कोयाबेकुर व्यपवर्तन योजना का पुनर्जीवन इस बात का प्रमाण है कि संवेदनशील नेतृत्व, दृढ़ प्रशासनिक इच्छाशक्ति और विकास के प्रति प्रतिबद्धता से वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान संभव है तथा सुकमा जैसे दूरस्थ अंचलों में भी समृद्धि की नई इबारत लिखी जा सकती है।