नक्सल साये से निकलकर शिक्षा की ओर बढ़ रहा सुकमा
सुकमा, 06 अगस्त 2026/sns/- कभी नक्सलवाद के अंधेरे और खौफ के लिए जाने जाने वाला सुकमा का दूरस्थ वनांचल आज शिक्षा की नई रोशनी से जगमगा रहा है। बुनियादी विकास के साथ-साथ जिले में शिक्षा का नया सवेरा लाने के लिए जिला प्रशासन लगातार नए प्रयोग कर रहा है। कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में शुरू हुआ “पालक ंकनेक्ट“ अभियान उन बच्चों के जीवन में वरदान साबित हो रहा है, जो किसी वजह से पढ़ाई छोड़ चुके थे (ड्रॉपआउट) या स्कूल से लगातार गायब रहते थे। यह पहल सिर्फ कागजी आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को दोबारा स्कूल की मुख्यधारा से जोड़कर उनके सपनों को नई उड़ान दे रही है।
इस अभियान की असली ताकत वे शिक्षक, प्राचार्य और संकुल समन्वयक हैं जो केवल औपचारिकताएं नहीं निभा रहे, बल्कि खुद दूर-दराज के गांवों तक पहुंच रहे हैं। शिक्षक दुर्गम रास्तों, जंगलों और पहाड़ों को पार करते हुए सीधे अभिभावकों के घर-घर दस्तक दे रहे हैं। बोर्ड परीक्षाओं में 75 प्रतिशत उपस्थिति की अनिवार्यता से लेकर बच्चों के प्रोग्रेस कार्ड दिखाकर, वे पालकों को पढ़ाई का महत्व समझा रहे हैं। पालकों की सहमति और निगरानी के लिए बाकायदा रजिस्टर में हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों के भीतर भी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर एक नई जिम्मेदारी और जागरूकता पैदा हुई है।
इस मानवीय पहल की एक बेहद भावुक और प्रेरक तस्वीर हाल ही में शासकीय बालक आवासीय हाई स्कूल (पोटाकेबिन) चिंतागुफा में देखने को मिली। शिक्षक सुदूर ग्राम बोदीगुड़ा और टेटरई के कठिन रास्तों से होते हुए बच्चों के घर पहुंचे। शिक्षकों की इस संवेदनशीलता और आत्मीयता ने ग्रामीणों का दिल जीत लिया, और उन्होंने अपने बच्चों को नियमित स्कूल भेजने का भरोसा दिया। इतना ही नहीं, एक बालक को तो शिक्षक खुद अपने साथ पोटाकेबिन लेकर आए ताकि उसकी छूटी हुई पढ़ाई फिर से पटरी पर लौट सके। शिक्षा के प्रति इस समर्पण की बानगी तब भी दिखी जब कक्षा सातवीं की एक लगातार अनुपस्थित रहने वाली छात्रा के परिजन घर पर नहीं मिले, तो शिक्षक ढूंढते हुए सीधे खेत तक जा पहुंचे और परिजनों से बेटी को रोज स्कूल भेजने की भावुक अपील की। जिन बच्चों तक शिक्षक शारीरिक रूप से नहीं पहुंच पाए, उनके पालकों से मोबाइल पर बात कर उन्हें पढ़ाई से जोड़ा गयाकृजिसके बाद कई अभिभावकों ने खुद बच्चों को शुक्रवार तक स्कूल छोड़ने का भरोसा दिया है।
जिला प्रशासन द्वारा संचालित श्पालक कनेक्टश् अभियान के तहत जमीनी स्तर पर प्रशासनिक मुस्तैदी और संवेदनशीलता की मिसाल पेश की जा रही है, जिससे दूरस्थ वनांचल का हर बच्चा शिक्षा के अधिकार से जुड़ रहा है। इसी कड़ी में हाई स्कूल पाकेला के शिक्षकों और समन्वयकों ने पेदापारा पहुंचकर लगातार अनुपस्थित रहने वाले छात्रों कृष्णा नाग, गणेश, सुमन और मोहित के परिजनों से सीधा संवाद कर उन्हें नियमित पढ़ाई के लिए प्रेरित किया, जबकि आदगुड़ा की शाला त्यागी बच्ची ज्योति सोड़ी का धुरवारास के समीपस्थ स्कूल में दाखिला कराकर उसका भविष्य संवारा गया। वहीं भेज्जी क्षेत्र के माड़वी हिड़मा (कक्षा 8वीं), माड़वी जोगा (कक्षा 7वीं) और उनदेर पारा के माड़वी संदीप (कक्षा 9वीं) को पुनः स्कूल भेजने के साथ-साथ रेगडगट्टा के वणजाम मुर्रा, गेडापाड इंजरम के माड़वी देवा, मैलासुर के मंडकम जोगा और पालाचलमा के सोढ़ी राकेश के पालकों से मोबाइल के माध्यम से सीधा संपर्क साधा गया। प्रशासन की इस प्रतिबद्धता और त्वरित पहल का ही सुखद परिणाम है कि अभिभावकों ने शुक्रवार तक बच्चों को स्कूल भेजने का पूर्ण आश्वासन दिया है।
“सशक्त आंगनबाड़ी अभियान“ से लेकर “पालक कनेक्ट“ तक, सुकमा का प्रशासन और शिक्षक मिलकर यह सुनिश्चित करने में जुटे हैं कि वनांचल का कोई भी बच्चा शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित न रहे। शिक्षकों के इस निस्वार्थ प्रयास ने उन जंगलों में उम्मीद का एक नया चिराग रोशन कर दिया है, जहां कभी डर का माहौल था। आज बदलते सुकमा की यह खूबसूरत तस्वीर गवाही दे रही है कि जिन हाथों में कभी अनिश्चितता थी, आज उन्हीं हाथों में थमी कलम और किताबें एक सशक्त और सुनहरे भविष्य की नई इबारत लिख रही हैं।