1044 आंगनबाड़ी केंद्रों में सशक्त आंगनबाड़ी अभियान ला रहा शिक्षा की नई क्रांति
सुकमा, 06 अगस्त 2026/sns/-छत्तीसगढ़ के दूरस्थ एवं वनांचल जिले सुकमा में नौनिहाल बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक अत्यंत सराहनीय एवं नवाचारी पहल की शुरुआत की गई है। कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में 11 जून 2026 से “सशक्त आंगनबाड़ी अभियान“ का भव्य आगाज किया गया। प्रशासन की इस दूरदर्शी सोच का मुख्य उद्देश्य 3 से 6 वर्ष के मासूम बच्चों को औपचारिक स्कूली शिक्षा से पहले ही एक सुदृढ़ शैक्षणिक माहौल प्रदान करना है। जिले के 1,044 आंगनबाड़ी केंद्रों में संचालित यह अभियान अब धरातल पर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नई इबारत लिख रहा है। अभियान की सबसे विशिष्ट बात प्राथमिक विद्यालयों के प्रशिक्षित शिक्षकों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का बेहतरीन समन्वय है। पास के प्राथमिक विद्यालयों से शिक्षक नियमित रूप से केंद्रों में पहुँचकर सप्ताह में 1 घंटे विशेष मॉड्यूल (मॉड्यूल 01 से 11) के तहत गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। यहाँ बच्चों को पारंपरिक तरीके के बजाय खेल-खेल में अक्षर ज्ञान, गिनती, बालगीत, रोचक कहानियां और विभिन्न रचनात्मक माध्यमों से सिखाया जा रहा है। इस सहभागितापूर्ण और आनंदमयी प्रक्रिया से न केवल बच्चों की सीखने में रुचि बढ़ी है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास का भी एक नया संचार देखने को मिल रहा है।
अभियान के प्रभाव और बच्चों के सीखने के स्तर का सटीक आकलन करने के लिए प्रशासन द्वारा एक सुव्यवस्थित पारदर्शी मूल्यांकन प्रक्रिया बनाई गई है। अगस्त 2026 के प्रथम एवं द्वितीय सप्ताह में कराए गए मॉड्यूल आधारित गतिविधियों का मूल्यांकन त्रिस्तरीय एवं जिला स्तर पर चरणबद्ध रूप से किया जा रहा है। जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री शिवदास नेताम ने बताया कि गुरुवार, 06 अगस्त 2026 को पंचायत स्तर पर सफलतापूर्वक मूल्यांकन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहाँ से होनहार बच्चों का चयन कर उन्हें आगे के स्तरों के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। पंचायत स्तर से चयनित प्रति ग्राम पंचायत 5-5 बच्चों का सेक्टर स्तर पर (08 अगस्त), सेक्टर स्तर से चयनित बच्चों का परियोजना स्तर पर (10 अगस्त) और अंततः परियोजना स्तर से चयनित 10-10 प्रतिभाशाली बच्चों का जिला स्तर पर (13 अगस्त) मूल्यांकन व चयन किया जाएगा। सुकमा जिला प्रशासन का यह भागीरथी प्रयास न केवल आंगनबाड़ी केंद्रों के कायाकल्प का प्रतीक बना है, बल्कि इसने ग्रामीण व आदिवासी अंचल के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समग्र विकास के नए द्वार भी खोल दिए हैं।