अब घर के द्वार तक पहुंचती है एंबुलेंस झापरा-पुष्पल्ली पक्की सड़क ने बदली दूरस्थ वनांचल की तस्वीर
सुकमा, 22 सितम्बर 2026/sns/- बस्तर के दूरस्थ अंचलों में विकास की असली परिभाषा तब साकार होती है, जब किसी बीमार स्वजन को कंधे पर उठाने की लाचारी खत्म हो जाए और बुनियादी सुविधाएं सीधे चौखट तक दस्तक देने लगें। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के “सुशासन और समग्र विकास“ के विजन को धरातल पर उतारते हुए सुकमा जिले के झापरा से पुष्पल्ली तक नवनिर्मित 10.80 किलोमीटर लंबी डामरीकृत सड़क ने ग्रामीणों के दशकों पुराने दर्द को हमेशा के लिए दूर कर दिया है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कार्यपालन अभियंता श्री मनीष साहू ने बताया कि 7 करोड़ 94 लाख 86 हजार रुपए की लागत से तैयार यह मार्ग महज गिट्टी और डामर की संरचना नहीं, बल्कि वनांचल के ग्रामीणों के लिए उम्मीद, स्वास्थ्य और स्वावलंबन की नई जीवनरेखा बनकर उभरा है।
कभी दलदल और ओडिशा का लंबा फेर था मजबूरी
सड़क बनने से पहले बरसात का मौसम यहां के ग्रामीणों के लिए किसी आपदा से कम नहीं होता था। कच्चे, ऊबड़-खाबड़ और दलदली रास्तों के कारण पहिए थम जाते थे। स्थिति इतनी विकट हो जाती थी कि अपने ही जिले के मुख्यालय सुकमा तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को पड़ोसी राज्य ओडिशा होकर लंबा और थकाऊ चक्कर लगाना पड़ता था। रोजमर्रा के हाट-बाजार, बच्चों की स्कूली शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों के लिए आवागमन एक भारी जद्दोजहद बनकर रह गया था। सबसे त्रासद स्थिति आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के दौरान बनती थी, जब कीचड़ और गड्ढों के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती थी।
आपातकाल में बनी जीवनदायिनी, 8 हजार की आबादी को मिली राहत
जिला प्रशासन की सतत निगरानी और गुणवत्तापूर्ण निर्माण के बाद अब परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। अब कुकेरास, कोसाबंदर, दरभा, मंगीपाल और पुष्पल्ली जैसे अंदरूनी गांवों के 8 हजार से अधिक ग्रामीणों की जिला मुख्यालय तक सीधी और बारहमासी पहुंच सुनिश्चित हो गई है। सबसे बड़ा बदलाव स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में आया है-अब “संजीवनी 108“ और “महतारी एक्सप्रेस“ “सेवा एक्सप्रेस“ जैसी आपातकालीन गाड़ियां बिना किसी बाधा के समय पर गांव पहुंच रही हैं, जिससे समय पर इलाज मिलना संभव हुआ है।
ग्रामीणों की जुबानी: “यह सिर्फ सड़क नहीं, हमारे लिए नया जीवन है“
गाँव में पक्की सड़क आने की खुशी ग्रामीणों के चेहरों और उनकी नम आंखों में साफ देखी जा सकती है। मंगीपाल निवासी श्री माड़वी सोना भावुक लहजे में साझा करते हैं, “पहले बारिश आते ही ऐसा लगता था जैसे हम पूरी दुनिया से कट गए हों। सुकमा जाने के लिए ओडिशा का फेर लगाना हमारी मजबूरी थी। इलाज के अभाव में अपनों की तकलीफ देखी नहीं जाती थी। अब जब पक्की सड़क सीधे गांव तक आ गई है, तो लगता है कि हमारी सदियों पुरानी पीड़ा दूर हो गई। यह सड़क हमारे लिए केवल आने-जाने का रास्ता नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य की राह है।“ वहीं कोसाबंदर निवासी श्री जोगा मड़कामी ने बताया कि पहले गांव में कोई बीमार पड़ जाए तो एंबुलेंस का पहुंचना नामुमकिन था। मरीज को खाट पर उठाकर ले जाना पड़ता था। अब फोन करते ही गाड़ी गांव तक आ जाती है। सड़क बनने से हमारी सबसे बड़ी चिंता दूर हो गई है।
कलेक्टर श्री अमित कुमार ने बताया कि जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण बुनियादी सुविधाएं और बारहमासी सड़क संपर्क पहुंचाना जिला प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। झापरा-पुष्पल्ली मार्ग के बनने से अंदरूनी गांवों के ग्रामीणों को अब हर मौसम में निर्बाध आवागमन और त्वरित आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल रहा है। प्रशासन का निरंतर प्रयास है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक सहजता से पहुंचे।
विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे अंदरूनी अंचल
झापरा-पुष्पल्ली मार्ग के पूरा होने से क्षेत्र में कृषि उत्पादों को मंडियों तक पहुंचाना, स्थानीय हाट-बाजारों की रौनक बढ़ाना और शासकीय योजनाओं की सुगम पहुंच सुनिश्चित करना आसान हो गया है। सुकमा के अंदरूनी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का यह विस्तार न केवल ग्रामीणों के जीवन स्तर को ऊंचा उठा रहा है, बल्कि विकास की रोशनी को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के शासन के संकल्प को भी मजबूती से चरितार्थ कर रहा है।