दूरस्थ अंचल में बेटियों की सेहत की फिक्र
सुकमा, 24 सितम्बर 2026/sns/- बस्तर के वनांचल में जब अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक संवेदनशील प्रशासन के संकल्प से जुड़ती है, तो बदलाव की नई इबारत लिखी जाती है। घोर नक्सल प्रभावित रहे आकांक्षी जिला सुकमा में कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन तथा मार्गदर्शन में संचालित कार्यक्रम के अंतर्गत कोंटा विकासखंड के सुदूर क्षेत्र एर्राबोर स्थित पोटाकाबिन में स्वास्थ्य विभाग और पीरामल स्वास्थ्य के संयुक्त तत्वावधान में एक विशेष टीबी स्क्रीनिंग शिविर आयोजित किया गया। इस मानवीय पहल के केंद्र में पोटाकाबिन की वे मासूम छात्राएं थीं, जिनकी सेहत की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य अमला खुद चलकर उनके द्वार तक पहुंचा और एक ही दिन में 124 बालिकाओं का चेस्ट एक्स-रे परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया।
सड़क और दूरी की चुनौतियों को मात देते हुए स्वास्थ्य दल अपने साथ आधुनिक “हैंडहेल्ड पोर्टेबल एक्स-रे मशीन“ लेकर पहुंचा, जो इस पूरे अभियान की रीढ़ साबित हुई। दूरदराज और दुर्गम इलाकों में जहां ग्रामीणों या स्कूली बच्चों को बुनियादी जांच के लिए मीलों दूर जिला या ब्लॉक अस्पताल जाना पड़ता था, वहां प्रशासन की इस कॉम्पैक्ट डिजिटल मशीन ने मौके पर ही मिनटों में फेफड़ों की सटीक जांच संभव बना दी। जांच की यह सहजता बच्चों के चेहरों पर बिना किसी भय के भरोसा जगाने वाली साबित हुई।
स्क्रीनिंग के दौरान स्वास्थ्य टीम ने पूरी सतर्कता बरतते हुए प्रारंभिक लक्षणों के आधार पर 18 बच्चियों को चिन्हित किया और तत्काल उनके बलगम के नमूने संकलित किए। इन नमूनों को बीमारी की अंतिम पुष्टि हेतु त्वरित रूप से दोरनापाल स्थित ट्रू-नॉट जांच केंद्र भेजा गया, ताकि समय रहते सटीक रिपोर्ट प्राप्त कर आवश्यकता पड़ने पर तुरंत उपचार शुरू किया जा सके। मौके पर ही जांच और आगे के परीक्षण की यह त्वरित व्यवस्था प्रशासन की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जहां केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि संपूर्ण समाधान को प्राथमिकता दी जाती है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. भुवन विजय कुर्रे के मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में जिला टीबी/एचआईवी समन्वयक जयनारायण सिंह, वरिष्ठ चिकित्सा पर्यवेक्षक कुंदल सिंह कुंजाम, रेडियोग्राफर लखन व अर्जुन सहित समर्पित दल ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। पोर्टेबल तकनीक और फील्ड टीमों का यह तालमेल यह साबित करता है कि सुकमा प्रशासन स्वास्थ्य सेवाओं को कागजों से निकालकर धरातल पर अंतिम व्यक्ति तक मजबूती से पहुंचा रहा है। सही समय पर पहचान और त्वरित उपचार की यह पहल वनांचल के बच्चों को स्वस्थ, सशक्त और सुरक्षित भविष्य देने की दिशा में एक अनुकरणीय कदम है।