सेवा की कहानीः रोज काम मिले न मिले, सालाना सहायता से परमेश्वर के परिवार को मिल रहा आर्थिक सहारा

अम्बिकापुर, 30 सितम्बर 2026/sns/-   रोज काम की तलाश और उसी मजदूरी से परिवार का गुजारा। अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत बकालो, भाटापारा के  रहने वाले श्री परमेश्वर की आजीविका इसी दैनिक मजदूरी पर निर्भर है। उनके पास स्वयं की जमीन नहीं है। ऐसे में दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत मिलने वाली 10 हजार रुपए की सहायता उनके चार सदस्यीय परिवार के लिए जरूरत के समय आर्थिक सहारा बन रही है।

परमेश्वर बताते हैं कि वे जहां काम मिलता है, वहां मजदूरी कर लेते हैं और उसी कमाई से परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करते हैं। परिवार में चार सदस्य हैं और बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी भी इसी आय से पूरी होती है। मजदूरी से होने वाली सीमित आमदनी के बीच योजना से मिलने वाली राशि से परिवार को अतिरिक्त आर्थिक मदद मिल रही है।

भूमिहीन परिवार के लिए मददगार बनी सहायता
स्वयं की जमीन नहीं होने के कारण परमेश्वर के पास खेती से आय का कोई साधन नहीं है। उनकी आजीविका मजदूरी पर ही निर्भर है। वे बताते हैं कि भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिए मिलने वाली सहायता राशि से घर की आवश्यकताओं और बच्चों के पालन-पोषण में काफी मदद हो जाती है।

परमेश्वर कहते हैं, “मेरे पास कोई जगह-जमीन नहीं है। रोज की मजदूरी करके कमाते हैं। परिवार में चार सदस्य हैं। कहीं-कहीं काम कर लेते हैं और उसी से घर चलता है। योजना से 10 हजार रुपए मिलते हैं, उससे बहुत मदद हो जाती है। बाल-बच्चों को पालने में भी यह पैसा काम आता है।

योजना की राशि ने बढ़ाया आर्थिक संबल
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत सामने आई परमेश्वर की कहानी बताती है कि भूमिहीन एवं मजदूरी पर निर्भर परिवार के लिए आर्थिक सहायता किस तरह दैनिक जरूरतों को पूरा करने में सहयोगी बन रही है। नियमित आय का साधन नहीं होने के बीच योजना से मिलने वाली राशि परिवार के खर्च में उपयोगी साबित हो रही है।

परमेश्वर ने योजना से मिल रही सहायता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि हम भूमिहीन परिवारों के लिए शासन की योजना संबल प्रदान कर रही है।

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