कच्ची झोपड़ी से पक्के घर तक का सफर, प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना
अम्बिकापुर, 06 अक्टूबर 2026/sns/- कभी कच्ची झोपड़ी और घास-फूस की छत के नीचे जीवन गुजारने वाले विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह के सदस्य श्री रोन्हू पिता सोनसाय, निवासी ग्राम पंचायत ससौली, जनपद पंचायत लुण्ड्रा, जिला सरगुजा, के जीवन में प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना (ग्रामीण) ने नई उम्मीद और स्थायित्व का संचार किया है। वर्ष 2023-24 में योजना के तहत 2 लाख रुपये की स्वीकृत राशि से बने पक्के आवास ने उनके परिवार को न केवल सुरक्षित छत दी, बल्कि जीवन जीने का आत्मविश्वास और सम्मान भी बढ़ाया है।
पहले बारिश के दिनों में कच्ची दीवारों और घास-फूस की छत से पानी टपकने, तेज आंधी में घर के क्षतिग्रस्त होने और ठंड के मौसम में परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती थी। कच्चे मकान में रहने के दौरान कीड़े-मकौड़ों और अन्य जोखिमों का खतरा भी बना रहता था। ऐसे में पक्का आवास मिलने के बाद रोन्हू का परिवार अब हर मौसम में अधिक सुरक्षित और निश्चिंत महसूस करता है।
’हर मौसम में सुरक्षा, जीवन में आया सुकून’
पक्के मकान ने रोन्हू के परिवार को बारिश, तेज हवाओं और कड़ाके की ठंड से सुरक्षा प्रदान की है। अब उन्हें हर वर्ष झोपड़ी की मरम्मत या घास-फूस बदलने पर होने वाले खर्च और मेहनत की चिंता नहीं रहती। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है और बचत का अवसर मिला है।
आवास के साथ बिजली, स्वच्छ पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता ने परिवार के जीवन स्तर को और बेहतर बनाया है। स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिलने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों में कमी आई है तथा बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध हुआ है।
’पक्का घर, बढ़ा आत्मविश्वास और सम्मान’
रोन्हू के लिए यह मकान सिर्फ ईंट-पत्थर से बना एक घर नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत है। पक्का आवास मिलने से उनके परिवार का सामाजिक आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वे स्वयं को विकास की मुख्यधारा से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं।
प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना (ग्रामीण) ने रोन्हू जैसे विशेष पिछड़ी जनजातीय परिवारों के जीवन में यह बदलाव लाकर यह सुनिश्चित किया है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े परिवार तक भी पहुंचे। एक पक्की छत ने उनके परिवार को सुरक्षा, सुविधा, सम्मान और भविष्य के प्रति विश्वास दिया है।