प्रधानमंत्री मृदा स्वास्थ्य कार्ड से सुरेन्द्र बारीक को मिला डेढ़ गुना अधिक कृषि लाभ
महासमुंद, 06 अक्टूबर 2026/sns/- प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा का एक आयाम किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के प्रयासों से जुड़ा है। इसी दिशा में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना किसानों को उनकी भूमि की वास्तविक जरूरत के अनुसार उर्वरकों के संतुलित उपयोग की जानकारी देकर खेती की लागत कम करने और उत्पादकता बढ़ाने में मदद कर रही है। महासमुंद जिले के पिथौरा विकासखंड के ग्राम अमोदिदीह निवासी कृषक श्री सुरेन्द्र बारीक की सफलता इसी बदलाव की कहानी है।
श्री सुरेन्द्र बारीक 2.45 एकड़ कृषि भूमि में खेती करते हैं और मुख्य रूप से धान की फसल लेते हैं। वर्ष 2022 से उनकी कृषि उत्पादकता लगातार कम हो रही थी, जबकि खेती की लागत बढ़ती जा रही थी। लगातार घटते उत्पादन और बढ़ती लागत से चिंतित होकर वर्ष 2024 में उन्होंने अपनी समस्या कृषि विभाग के अधिकारियों के समक्ष रखी। अधिकारियों ने उन्हें सबसे पहले खेत की मिट्टी का परीक्षण कराने की सलाह दी।
कृषि विभाग के मार्गदर्शन में कृषक श्री बारीक ने अपने खेत की मिट्टी का नमूना मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में भेजा। परीक्षण के बाद प्राप्त मृदा स्वास्थ्य कार्ड से उन्हें अपनी मिट्टी की पोषक स्थिति और उर्वरकों की वास्तविक आवश्यकता की जानकारी मिली। इससे उन्हें पता चला कि वे आवश्यकता से अधिक यूरिया का उपयोग कर रहे थे। प्रधानमंत्री मृदा स्वास्थ्य कार्ड में प्राप्त सलाह के अनुसार श्री बारीक ने प्रति एकड़ यूरिया की मात्रा में एक बोरी की कमी की। साथ ही मिट्टी का पीएच संतुलित किया और प्रति एकड़ 10 किलोग्राम जिंक का उपयोग शुरू किया। इसके अलावा उन्होंने रबी मौसम में दलहन की फसल को फसल चक्र में शामिल किया। इन वैज्ञानिक एवं संतुलित कृषि पद्धतियों को अपनाने का परिणाम उन्हें एक वर्ष के भीतर ही दिखाई देने लगा।
श्री बारीक बताते हैं कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग से अनावश्यक खर्च कम हुआ, जिससे खेत की उत्पादकता में भी वृद्धि हुई। पहले जहां लगातार उत्पादन घट रहा था, वहीं मृदा स्वास्थ्य कार्ड की सलाह के अनुरूप खेती करने के बाद उनकी आय और कृषि लाभ में सुधार आया तथा उनका फायदा लगभग डेढ़ गुना तक बढ़ गया।