सेवा की कहानी आजीविका डबरी से लक्ष्मी प्रसाद को मिला दोहरा लाभ

अम्बिकापुर, 29 सितम्बर 2026/sns/-  आजीविका डबरी ग्रामीण परिवारों के लिए केवल जल संरक्षण का साधन नहीं, बल्कि आय और खेती दोनों का आधार बन रही है। ग्रामीण रोजगार योजना के तहत परिवार की जमीन पर बनी डबरी ने लक्ष्मी प्रसाद के लिए मछली पालन से आमदनी का रास्ता खोला है। इसके साथ ही डबरी में उपलब्ध पानी का उपयोग साग-सब्जी और गेहूं की खेती की सिंचाई में भी किया जा रहा है।

बतौली विकासखंड के रहने वाले लक्ष्मी प्रसाद बताते हैं कि उनकी माता के नाम से ग्रामीण रोजगार योजना के तहत डबरी का निर्माण कराया गया है। डबरी बनने के बाद उन्होंने पिछले वर्ष से इसमें मछली पालन शुरू किया। इससे परिवार को अतिरिक्त आमदनी मिल रही है। वहीं डबरी में संग्रहित पानी ने आसपास की खेती के लिए सिंचाई की सुविधा भी उपलब्ध कराई है।

’मछली पालन से लगभग एक लाख रुपए की आय’
लक्ष्मी प्रसाद के अनुसार डबरी में मछली उत्पादन का आकलन करीब 20 क्विंटल तक है। मछली की बिक्री से उन्होंने लगभग एक लाख रुपए की आय अर्जित की है। वे हर साल डबरी में करीब 8 से 10 किलो मछली बीज डालते हैं। मछलियों की बढ़वार और उत्पादन के अनुसार उन्हें इससे आमदनी प्राप्त होती है।

लक्ष्मी प्रसाद कहते हैं, “पिछले साल से मछली पालन कर रहा हूं। करीब 20 क्विंटल का आकलन है और मछली बेचकर लगभग एक लाख रुपए की आमदनी हुई है। हर साल 8 से 10 किलो मछली बीज डालते हैं।”

’मछली के साथ साग-सब्जी और गेहूं की खेती को भी पानी’
डबरी ने लक्ष्मी प्रसाद के परिवार को मछली पालन के साथ खेती के लिए भी सहारा दिया है। डबरी में उपलब्ध पानी का उपयोग वे साग-सब्जी और गेहूं की फसल की सिंचाई के लिए करते हैं। इस तरह एक ही संरचना से परिवार को आजीविका और कृषि दोनों गतिविधियों में लाभ मिल रहा है।

’डबरी बनी परिवार की आजीविका का आधार’
जल संग्रहण के साथ उसका आजीविका गतिविधियों में उपयोग लक्ष्मी प्रसाद के लिए लाभकारी साबित हुआ है। पहले जहां जमीन पर उपलब्ध पानी का सीमित उपयोग था, वहीं डबरी बनने के बाद मछली पालन के रूप में अतिरिक्त आय का स्रोत तैयार हुआ और खेती के लिए सिंचाई की उपलब्धता भी बढ़ी।

लक्ष्मी प्रसाद ने आजीविका डबरी की सुविधा मिलने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया। उनका कहना है कि डबरी से मछली पालन के जरिए आय मिलने के साथ ही खेती-बाड़ी के लिए पानी उपलब्ध होने से परिवार को दोहरा लाभ मिल रहा है।

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