संघर्ष से आत्मनिर्भर बनीं बैंक सखी साहिदा बेगम, डेढ़ हजार से बढ़कर 10 हजार रुपये हुई मासिक आय

अम्बिकापुर, 19 अक्टूबर 2026/sns/-   सरगुजा जिले के लुण्ड्रा विकासखंड अंतर्गत ग्राम बतवाही की बैंक सखी साहिदा बेगम ने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। शारीरिक चुनौती और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने स्वयं का कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) स्थापित कर आर्थिक स्थिति मजबूत की है। कभी मात्र 1500 रुपये प्रतिमाह की नौकरी करने वाली साहिदा आज बैंकिंग एवं डिजिटल सेवाओं के माध्यम से करीब 10 हजार रुपये अधिक की मासिक आय अर्जित कर रही हैं

साहिदा बेगम के एक पैर में शारीरिक समस्या है, जिसके कारण उन्हें चलने के लिए डंडे का सहारा लेना पड़ता है। एकल अभिभावक होने के साथ उन पर अपनी मां की देखभाल की भी जिम्मेदारी है। पहले वे दूसरे सीएससी सेंटर में काम करती थीं, जहां सीमित वेतन से परिवार की जरूरतें पूरी करना कठिन था। ऐसे में उन्होंने स्वयं का रोजगार शुरू करने का निर्णय लिया। सीएससी का कार्य सीखने के बाद ऋण लेकर लैपटॉप खरीदा और वर्ष 2022 में सीएससी आईडी के लिए आवेदन किया। इसके बाद प्रिंटर एवं फोटोकॉपी मशीन की व्यवस्था कर सेवाओं का विस्तार किया।

आज साहिदा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक की बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) के रूप में प्रतिमाह लगभग 150 बैंकिंग लेन-देन करती हैं। इसके साथ ही अटल डिजिटल सुविधा केंद्र की वीएलई के रूप में मोबाइल रिचार्ज, बिजली बिल भुगतान, पैन कार्ड, एग्रीस्टैक और विभिन्न ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। उन्होंने महतारी वंदन योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 1600 हितग्राहियों का ई-केवाईसी किया है। इससे ग्रामीणों को आवश्यक बैंकिंग एवं डिजिटल सुविधाएं गांव में ही प्राप्त हो रही हैं।

निरंतर प्रयासों से साहिदा ने अपने व्यवसाय का विस्तार किया है। वर्तमान में उन्होंने किराए की दुकान में सीएससी सेंटर स्थापित किया है, जहां दो लैपटॉप सहित अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं। सेवाओं के विस्तार से उनकी मासिक आय लगभग 10 हजार रुपये तक पहुंच गई है, जिससे परिवार की आर्थिक जरूरतें पूरी करने में मदद मिल रही है।

साहिदा बेगम की सफलता महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार का प्रेरक उदाहरण है। उन्होंने शारीरिक एवं आर्थिक चुनौतियों के बीच आत्मनिर्भर बनने के साथ ग्रामीणों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका यह प्रयास दर्शाता है कि दृढ़ संकल्प और मेहनत से कठिन परिस्थितियों में भी सफलता की राह बनाई जा सकती है।

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