बंदूक छोड़ी, उम्मीदें थामींरू सुकमा के जंगलों में अब गूँजेगी विकास की डिजिटल दस्तक

सुकमा, 27 फरवरी 2026/sns/-बस्तर के घने जंगलों की खामोशी अब उम्मीदों की गूँज में बदल रही है। सुकमा के नक्सल पुनर्वास केंद्र में एक ऐसी तस्वीर उभरी, जो न केवल प्रशासनिक सफलता को दर्शाती है, बल्कि उन हाथों के लिए एक नई सुबह का प्रतीक भी है, जिन्होंने कभी हिंसा का रास्ता चुना था। छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष श्री आर.एस. विश्वकर्मा ने जब आत्मसमर्पित युवाओं से हाथ मिलाया, तो वह केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी। वह एक “आत्मीय संवाद“ थाकृएक पिता समान बड़े का उन भटके हुए युवाओं को जीवन की राह दिखाने का प्रयास।
भविष्य की नई “कनेक्टिविटी“
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण वह था जब 7 आत्मसमर्पित युवाओं के हाथों में अत्याधुनिक 5जी स्मार्टफोन सौंपे गए। कल तक जो हाथ दुर्गम पहाड़ियों में बंदूकें संभाले थे आज वही हाथ अब डिजिटल दुनिया से जुड़कर अपने भविष्य की नई कहानी लिखेंगे। ये स्मार्टफोन केवल गैजेट नहीं, बल्कि बाहरी दुनिया से जुड़ने वाली वो खिड़की हैं, जो इन युवाओं को उनके अंधेरे अतीत से निकालकर सूचना और अवसरों के उजाले में ले जाएंगी।
“अपने पैरों पर खड़े हो जाओ“
अध्यक्ष श्री आरएस विश्वकर्मा ने युवाओं की आँखों में आँखें डालकर कहा, “अब आप समाज का हिस्सा हैं। कृषि और स्वरोजगार के अवसरों का लाभ उठाएं और अपने पैरों पर खड़े होकर समाज के लिए मिसाल बनें।“ कलेक्टर श्री अमित कुमार और जिला सीईओ श्री मुकुन्द ठाकुर की मौजूदगी इस बात का प्रमाण थी कि शासन केवल आदेश नहीं देता, बल्कि साथ खड़ा होकर संबल भी प्रदान करता है।
बदलाव की बयार
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के दूरदर्शी नेतृत्व में सुकमा का यह पुनर्वास केंद्र अब केवल एक सरकारी भवन नहीं, बल्कि श्सपनों का वर्कशॉपश् बन गया है। जहाँ कभी अविश्वास की दीवारें थीं, वहाँ अब विकास के पुल बन रहे हैं।
अतिथियों की उपस्थिति
इस अवसर पर पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य श्री कृष्णा गुप्ता, श्री बलदाऊ राम, श्री यशवंत वर्मा, श्री हरिशंकर यादव, श्रीमती शैलेंद्री परगनिहा, एसडीएम सुकमा श्री सूरज कश्यप, डिप्टी कलेक्टर सुश्री मधु तेता, डीएसपी सुश्री मोनिका श्याम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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