पीएम-आशा अंतर्गत जिले में दलहन-तिलहन फसलों की खरीदी शुरू, 5 उपार्जन केन्द्र प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत अधिसूचित

बलौदाबाजार, 7 अप्रैल 2026/sns/- प्रधानमंत्री-अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) अंतर्गत प्राईस सपोर्ट स्कीम के तहत जिले में दलहन एवं तिलहन फसलों की खरीदी प्रारम्भ हो गई है।

पीएम-आशा के अंतर्गत प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) के तहत् जिले में 5 उपार्जन केन्द्रों जिसमें प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति बलौदाबाजार, अमेरा, धुर्राबांधा, कसडोल एवं सिमगा का नाम शासन द्वारा अधिसूचित किया गया है। जिले में अब तक 899 कृषकों द्वारा कुल 1125.34 हेक्टेयर रकबे का पंजीयन चना, मसूर एवं सरसों विक्रय हेतु किया गया है। योजनांतर्गत उपार्जन केन्द्र बलौदाबाजार, अमेरा एवं धुर्राबांधा समिति में खरीदी शुरू हो गई है। जिसमें तीन कृषकों द्वारा 10 क्विंटल सरसों एवं 0.50 क्विंटल मसूर का विक्रय किया गया है।

पीएम आशा योजना के तहत सरकार ने अरहर (तूअर), उड़द और मसूर जैसी प्रमुख दालों की सौ फीसदी खरीदारी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। इस पहल के तहत भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड) और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ) किसानों से सीधे खरीद करेंगे। किसानों को उनकी फसल की उचित और समय पर कीमत मिलेगी। यह पहल किसानों को दलहन एवं तिलहन उत्पादन की ओर आकर्षित करेगी, जिससे भारत आयात पर निर्भरता कम करके घरेलू आत्मनिर्भरता हासिल करेगा।दलहन एवं तिलहन आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत की गई है।जिससे किसानों की आय बढ़ाने और दलहन एवं तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने का लक्ष्य है।

योजना का प्रमुख उद्देश्य कृषकों से दलहनी तथा तिलहनी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी करना है। इसके अंतर्गत अरहर, उड़द एवं मसूर का शत् प्रतिशत उपार्जन तथा शेष फसलों जैसे मूंगफली, सोयाबीन, मूंग, चना, सरसों का राज्य के उत्पादन का 25 प्रतिशत् उपार्जन केन्द्र सरकार द्वारा अपनी प्रापण संस्थाओं (प्रोक्योरमेंट एजेंसीज) नाफेड तथा एनसीसीएफ के माध्यम से किया जा रहा है। जिससे दाल उगाने वाले किसानों को उनकी मेहनत का पूरा पैसा मिले और उनकी फसल की समय पर खरीद की जा सके।केन्द्र सरकार द्वारा मिशन का एक और प्रमुख उद्देश्य फसलों के उत्पादन के बाद वैल्यू चेन को मजबूत करना है। इसके लिए सरकार 1,000 प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट की स्थापना करेगी। प्रत्येक यूनिट को 25 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी। इन यूनिट्स से फसल का नुकसान घटेगा, वैल्यू एडिशन बढ़ेगा और गांवों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा, नीति आयोग की सिफारिशों के आधार पर क्लस्टर बेस्ड अप्रोच अपनाया जाएगा। इससे संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल, जियोग्राफिकल डाइवर्सिफिकेशन और फसल उत्पादन में क्षेत्रीय संतुलन प्राप्त किया जा सकेगा। सरकार ने इस मिशन के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय किए हैं, जो 2030-31 तक हासिल करने की योजना है।

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