फसल विविधिकरण से बदली किसानों की तकदीर
बलौदाबाजार, 17 अप्रैल 2026/sns/-जिले में कृषि विविधिकरण की नई तस्वीर उभर रही है। किसान परम्परागत धान फसल के साथ-साथ फसल चक्र परिवर्तन को अपना रहे हैं और दलहन, तिलहन एवं लघु धान्य फसलों (कोदो, रागी) की खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं। ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर अब अन्य फसलों के साथ-साथ रागी की खेती में बढ़ती भागीदारी से जिले में सकारात्मक बदलाव हो रहा है। यह परिवर्तन न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक बन रहा है बल्कि भूमि की उर्वरता संरक्षण और जल संसाधनों के संतुलित उपयोग में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्तमान रबी सीजन में लगभग 193 हेक्टेयर क्षेत्र में रागी की खेती जिले के किसानों द्वारा की जा रही है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत विकासखण्ड भाटापारा के ग्राम सेमराडीह, सिंगारपुर, निपनिया, कुम्हारखान सहित अन्य ग्रामों में रागी की खेती की जा रही है। जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता का लाभ देकर वैकल्पिक फसलों की खेती के लिए निरंतर प्रयास एवं प्रोत्साहित किया जा रहा है। उप संचालक कृषि दीपक कुमार नायक के मार्गदर्शन में लगाए गए रागी फसल प्रदर्शन का निरीक्षण कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा किया गया। अधिकारियों ने कृषक नन्दराम वर्मा के खेत में पहुंचकर रागी फसल की वृद्धि, पोषण प्रबंधन की स्थिति एवं उत्पादन संभावनाओं का अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, समय पर सिंचाई एवं कीट-रोग प्रबंधन के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया। साथ ही रागी जैसी पोषक एवं कम लागत वाली फसल को अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया गया।
उल्लेखनीय है कि रागी खाने से कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं। इससे बनी रोटियां शुगर, बीपी और कुपोषण जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए फायदेमंद हैं। खासतौर पर कुपोषित बच्चों को रागी खिलाने से पोषण की कमी पूरी हो जाती है। मिलेट (रागी) बदलते मौसम की स्थिति का सामना कर सकता है, कम इनपुट की आवश्यकता होती है, कम अवधि में बढ़ता है और लगभग सभी प्रकार की मिट्टी में अच्छी तरह से ढल जाता है। इस दौरान वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी अवधेश उपाध्याय, कृषि विकास अधिकारी हरीकिशन महिलांग, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्री खिलेश डिन्डेकर एवं एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजर मुकेश तिवारी उपस्थित रहे।