चिरायु से नन्हें सात्विक का जीवन हुआ गुंजायमान सुनने की क्षमता हुई विकसित
बलौदाबाजार, 25 अप्रैल 2026/sns/- राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चिरायु बच्चों के लिये संजीवनी से कम नहीं है। कई गंभीर रोगों का निःशुल्क ईलाज से जीवन में खुशियां ला रहा है। इसी कड़ी में एक जन्मजात श्रवणबाधित बच्चे क़ी श्रवण क्षमता लौटी जिससे उसके जीवन में मधुर ध्वनि गूंजने लगा।
भाटापारा शहर में चिरायु टीम द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र में स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान 5 वर्षीय बच्चे सात्विक कोसले की पहचान की गई जिसे जन्म से ही सुनने की समस्या थी। इस जन्मजात श्रवणबाधिता का बाद में स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में सफल कॉक्लियर इंप्लांट किया गया जिससे बच्चे के सुनने की क्षमता विकसित हुई है।
बच्चे की मां ममता कोसले ने बताया किउनके दो बच्चे हैं। सात्विक बड़ा बच्चा है जब वह लगभग 3 वर्ष का था तब हमें ज्ञात हुआ कि उसमें यह जन्मजात श्रवणबाधिता है। ऐसे में निजी अस्पतालों में उपचार के बारे में पता करने पर वहां लगभग 6 से 7 लाख का खर्च बताया गया,चूँकि बच्चे के पिता एक निजी संस्थान में काम करते हैं और सामान्य आर्थिक स्थिति है, ऐसे में इतनी बड़ी राशि की व्यवस्था नहीं कर पाए । जब भाटापारा की चिरायु टीम से संपर्क हुआ तब आगे की प्रक्रिया बढ़ी और आशा जगी कि बच्चे का उपचार हो जाएगा । भाटापारा के खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेन्द्र माहेश्वरी के अनुसार बच्चे की प्राम्भिक जाँच कर के उसे ऑपरेशन हेतु एम्स रायपुर रेफर किया गया जहाँ पूर्णतः निःशुल्क उपचार किया गया ।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ राजेश अवस्थी ने बताया कि कॉक्लियर इम्प्लांट एक मेडिकल डिवाइस है जो श्रवण बाधिता से ग्रस्त मरीजों को सुनने की क्षमता प्रदान करता है । सर्जरी द्वारा यह कान के पीछे लगाया जाता है । निजी अस्पतालों में यह काफी खर्चीला होता है जबकि चिरायु द्वारा यह निःशुल्क कराया जाता है । चिरायु क़ी मेडिकल टीम द्वारा सतत रूप से आंगनबाड़ी केंद्रों तथा स्कूल में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है । इस दौरान किसी बीमारी से पीड़ित बच्चे के उपचार की निःशुल्क व्यवस्था की जाती है।