सुकमा के सुदूर अंचलों में गूंजी शिक्षा की गूंज

सुकमा, 23 जून 2026/sns/- मुख्यमंत्री के मंशानुरूप और जिला प्रशासन के कुशल मार्गदर्शन में सुकमा जिले के नक्सल प्रभावित रहे व सुदूर विकासखंड कोंटा अंतर्गत जगरगुंडा में संकुल स्तरीय “शाला प्रवेशोत्सव“ का अभूतपूर्व व उत्साहजनक आयोजन किया गया। जगरगुंडा, सिलगेर, मिसिगुड़ा, मिलमपल्ली एवं बंजेपल्ली जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रशासन का यह प्रयास बेहद सराहनीय रहा। कार्यक्रम में पहली बार स्कूल की दहलीज पर कदम रखने वाले नवप्रवेशी नन्हे-मुन्नों का तिलक लगाकर और पुष्पगुच्छ भेंट कर भावभीना स्वागत किया गया। इसके साथ ही बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले का मान बढ़ाने वाले मेधावी छात्रों को भी मंच पर सम्मानित किया गया, जो क्षेत्र में बदलते शैक्षणिक परिवेश और प्रशासन की मेहनत का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारते हुए कार्यक्रम में उपस्थित सभी नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं को राज्य सरकार की योजना के तहत निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, कॉपियां, पेन और गणवेश (यूनिफॉर्म) का वितरण किया गया। शिक्षा सत्र के पहले ही दिन सारी जरूरी शिक्षण सामग्री हाथों में पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे और स्थानीय अभिभावकों में प्रशासन के प्रति भारी उत्साह व विश्वास देखा गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य कोरसा सन्नू सहित विशिष्ट अतिथियों, स्थानीय जन-प्रतिनिधियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने बच्चों को शासन की इन सुविधाओं का लाभ उठाकर मन लगाकर पढ़ने तथा जीवन में निरंतर आगे बढ़ने का संदेश दिया।
इस गरिमामयी अवसर पर जन-प्रतिनिधियों ने प्रशासन की पीठ थपथपाते हुए कहा कि शिक्षा ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव है और राज्य सरकार का यह अभियान हर बच्चे को उसका यह बुनियादी अधिकार दिलाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है। शाला प्रवेशोत्सव केवल एक औपचारिक आयोजन न रहकर, सुदूर वनांचल के बच्चों को शिक्षा के उजियारे से जोड़ने का एक महा-अभियान बन चुका है ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। कार्यक्रम में संकुल के शिक्षकों, पालकों और ग्रामीणों की भारी मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि शासन के प्रयासों से अब बस्तर के दूरस्थ इलाकों में भी शिक्षा के

About The Author