बंदूक छोड़ विकास की मुख्यधारा से जुड़े बण्डो राकेश की कहानी

सुकमा, 23 जूलाई 2026/sns/- नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति, सुरक्षा और समृद्धि की बहाली के लिए समर्पित जिला प्रशासन ने पुनर्वास और लोक कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से एक बार फिर सफलता की नई इबारत लिखी है। कभी हिंसा की राह पर रहे प्रतिबंधित संगठन के सदस्य रहे बण्डो राकेश उर्फ जोगेन्द्र (पिता बण्डो हड़मा) ने वर्ष 2016 में समाज की मुख्यधारा में लौटने का ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए पुलिस अधीक्षक कार्यालय सुकमा में आत्मसमर्पण किया था। प्रशासन ने न केवल उनका खुले दिल से स्वागत किया, बल्कि उनके बेहतर भविष्य के लिए पुनर्वास नीतियों के तहत हरसंभव सहायता सुनिश्चित की। इसी का सुखद परिणाम है कि आज वे पूरी तरह से एक सामान्य और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति को धरातल पर उतारते हुए सुकमा प्रशासन ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में श्प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीणश् के अंतर्गत एक विशेष परियोजना के तहत बण्डो राकेश के लिए पक्के मकान की स्वीकृति प्रदान की है। जनपद व जिला पंचायत सुकमा के कुशल मार्गदर्शन में ग्राम पंचायत जीरमपाल (मुतोड़ी) ने इस योजना के क्रियान्वयन में एक आदर्श और सफल मिसाल पेश की है। मुख्यधारा में लौटे नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं, जैसे पक्की छत और आजीविका के साधन प्राथमिकता से प्रदान करना, यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि स्थानीय प्रशासन अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध और तत्पर है।

प्रशासन की यह सराहनीय पहल क्षेत्र के  युवाओं के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन गई है, जो यह साबित करती है कि विकास और शांति का मार्ग जीवन को सुरक्षित और खुशहाल बना सकता है। ग्राम पंचायत द्वारा प्रस्तुत किया गया यह सफल क्रियान्वयन न केवल सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और गति को रेखांकित करता है, बल्कि माओवाद के खोखले दावों को खारिज कर प्रशासन पर जनता के अटूट विश्वास को मजबूत करता है। सुकमा जिला प्रशासन की इस नीतिगत तत्परता ने साबित कर दिया है कि बंदूकों की गूंज से प्रभावित रहे इस अंचल में अब खुशहाली, पक्के मकान और सुरक्षित भविष्य की एक नई सुबह आ चुकी है।

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