मोर गांव मोर पानी अभियान बना जल संरक्षण का प्रभावी मॉडल

बिलासपुर, 28 जुलाई 2026/sns/- जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए जिले में कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल के मार्गदर्शन में संचालित ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान उल्लेखनीय परिणाम दे रहा है। अभियान के तहत जिले में जल संकट से निपटने, भू-जल स्तर में सुधार लाने तथा किसानों की आजीविका को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से 441 हितग्राहियों की निजी भूमि पर आजीविका डबरियों का निर्माण कराया गया है। वर्षाकाल में इन डबरियों में वर्षा जल का संग्रहण किया जा रहा है, जिससे जल संरक्षण के साथ-साथ किसानों को पूरे वर्ष कृषि कार्यों के लिए पानी उपलब्ध हो रहा है।
इन डबरियों की विशेषता यह है कि प्रत्येक डबरी में लगभग 1300 घन मीटर वर्षा जल संग्रहित करने की क्षमता है। संग्रहित जल का उपयोग किसान सिंचाई, मछली पालन, पशुपालन, बागवानी तथा अन्य कृषि आधारित गतिविधियों में कर रहे हैं। इससे किसानों की खेती वर्षा पर पूरी तरह निर्भर नहीं रह गई है और आवश्यकता के समय सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध होने से फसलों की उत्पादकता में भी वृद्धि हो रही है। डबरियों का लाभ केवल जल संग्रहण तक सीमित नहीं है। प्रत्येक डबरी के माध्यम से वर्षाकाल में लगभग 2600 घन मीटर भू-जल पुनर्भरण (वाटर रिचार्ज) भी हो रहा है। इससे आसपास के क्षेत्रों में भू-जल स्तर में सुधार आ रहा है तथा कुएं, हैंडपंप और अन्य जल स्रोतों में पानी की उपलब्धता लंबे समय तक बनी रहने में मदद मिल रही है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों के सतत प्रबंधन की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
जिला प्रशासन का यह प्रयास जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और कृषि विकास को एक साथ आगे बढ़ाने का सफल उदाहरण बनकर सामने आया है। ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के माध्यम से निर्मित आजीविका डबरियां न केवल वर्षा जल को संरक्षित कर रही हैं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। यह पहल भविष्य में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण की दिशा में एक प्रभावी मॉडल के रूप में स्थापित हो रही है।

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