₹1.50 लाख के ऋण और 35% सब्सिडी ने बदली लक्ष्मी नारायण की राह, हुनर को मिला कारोबार
बीजापुर, 10 अगस्त 2026/sns/- प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) ग्रामीण क्षेत्र के कारीगरों और छोटे उद्यमियों को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जिले के मद्देड़ निवासी श्री लक्ष्मीनारायण कुनारप की सफलता की कहानी इसका प्रेरणादायक उदाहरण है। वर्षों से बढ़ई का कार्य कर परिवार का भरण-पोषण कर रहे लक्ष्मीनारायण को PMEGP के माध्यम से आर्थिक सहयोग मिला, जिससे उन्होंने अपने पारंपरिक हुनर को आधुनिक स्वरूप देकर व्यवसाय का विस्तार किया।
पूंजी के अभाव में सीमित था व्यवसाय
श्री लक्ष्मीनारायण कई वर्षों से कारपेंटर के रूप में दरवाजे, खिड़कियां, फर्नीचर एवं लकड़ी से संबंधित अन्य निर्माण कार्य करते आ रहे थे। पर्याप्त पूंजी और आधुनिक मशीनों के अभाव में उनका काम सीमित दायरे तक ही था। बड़े कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण उनकी उत्पादन क्षमता और आय भी सीमित थी।
इसी दौरान उन्हें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) की जानकारी मिली। उन्होंने योजना के अंतर्गत आवेदन किया और छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक, माड़ेड शाखा से ₹1.50 लाख का ऋण स्वीकृत हुआ। साथ ही उन्हें 35 प्रतिशत मार्जिन मनी सब्सिडी, लगभग ₹52 हजार का लाभ मिला।
आधुनिक मशीनों से बढ़ी काम की रफ्तार और गुणवत्ता
ऋण एवं सब्सिडी से प्राप्त आर्थिक सहयोग का उपयोग उन्होंने आधुनिक कारपेंट्री मशीनों और आवश्यक उपकरणों की खरीद में किया। नई मशीनों से उनके काम की गुणवत्ता, गति और उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ। अब वे पहले की तुलना में अधिक और बेहतर कार्य समय पर पूरा कर पा रहे हैं।
आज श्री लक्ष्मीनारायण अपने क्षेत्र में दरवाजे, खिड़कियां, फर्नीचर सहित विभिन्न लकड़ी निर्माण कार्य सफलतापूर्वक कर रहे हैं। आसपास के गांवों, स्थानीय बाजार और निजी ग्राहकों से उन्हें नियमित रूप से कार्य मिलने लगा है। इससे उनकी मासिक आय में वृद्धि हुई है और परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में भी आसानी हो रही है।
“PMEGP ने दिया नया आत्मविश्वास”
श्री लक्ष्मीनारायण बताते हैं कि PMEGP योजना और बैंक से मिले सहयोग ने उनके व्यवसाय को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहायता के अभाव में आधुनिक मशीनें खरीदकर व्यवसाय का विस्तार करना उनके लिए मुश्किल था। योजना से उन्हें न केवल व्यवसाय बढ़ाने का अवसर मिला, बल्कि आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिरता भी प्राप्त हुई।
वे अन्य युवाओं और कारीगरों से भी अपील करते हैं कि वे अपनी रुचि एवं हुनर के अनुसार स्वरोजगार स्थापित करने के लिए शासन की योजनाओं का लाभ उठाएं।
हुनर को मिला अवसर, आत्मनिर्भरता की बनी राह
श्री लक्ष्मीनारायण कुनारप की सफलता यह दर्शाती है कि हुनर के साथ पूंजी और सही मार्गदर्शन का सहयोग मिल जाए तो स्वरोजगार को सफल व्यवसाय में बदला जा सकता है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम जैसे प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर बढ़ाने के साथ ही लोगों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।