कच्ची दीवारों से पक्के सपनों तकः पीएम आवास ने बदली आवासहीन परिवारों की जिंदगी

अम्बिकापुर, 16 सितम्बर 2026/sns/-    कभी मिट्टी की दीवारों के सहारे जिंदगी गुजरती थी। बरसात आते ही टपकती छत की चिंता सताती थी और सर्दियों में ठंडी हवाओं से बचना मुश्किल होता था। रात में परिवार की सुरक्षा की चिंता अलग रहती थी। घर की मरम्मत और लिपाई-पुताई में हर साल सीमित आमदनी का एक हिस्सा खर्च हो जाता था। ऐसे परिवारों के लिए पक्का मकान केवल चार दीवारें और छत नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्थायित्व, सम्मान और बेहतर भविष्य की शुरुआत है।अंबिकापुर और उदयपुर विकासखंड के पहाड़ी कोरवा परिवारों की कहानियां बताती हैं कि प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम जनमन) के तहत आवास मिलने से उन परिवारों के जीवन में किस तरह बदलाव आया है।
पीएम आवास योजना से ही आज मोहन राम के परिवार को  सुरक्षित छत मिली है। अंबिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मलंगवा खुर्द के रामनगर निवासी मोहन राम पहाड़ी कोरवा वर्षों तक कच्चे मिट्टी के मकान में परिवार के साथ रहे। बारिश में छत टपकना और घर की मरम्मत उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया था। चार बच्चों और वृद्ध मां की सुरक्षा को लेकर उन्हें हमेशा चिंता रहती थी। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे स्वयं पक्का मकान बनवा सकें।
पीएम जनमन आवास योजना के तहत आवास मिलने के बाद उनका वर्षों पुराना सपना पूरा हुआ। अब उनका परिवार पक्के मकान में सुरक्षित जीवन जी रहा है। घर मिलने से उन्हें मौसम की मार और असुरक्षित आवास की चिंता से राहत मिली है।
ऐसी ही एक कहानी है मोटू राम की जिन्हें आवास मिलने से खत्म हुआ हर साल का उनके मरम्मत का खर्च। ग्राम पंचायत आमादरहा के मोटू राम पहाड़ी कोरवा खेती-बाड़ी और छोटी किराना दुकान से परिवार का भरण-पोषण करते हैं। दो बच्चों वाले इस परिवार के लिए पक्का मकान बनाना आर्थिक रूप से संभव नहीं था। पुराने कच्चे घर की छत बारिश में टपकती थी और हर साल लिपाई-पुताई तथा मरम्मत में समय और कमाई खर्च करनी पड़ती थी।
पीएम जनमन आवास योजना के तहत उन्हें पक्का आवास स्वीकृत हुआ। आवास का अधिकांश निर्माण पूरा हो चुका है और शेष कार्य अंतिम चरण में है। मोटू राम के लिए यह सिर्फ मकान का निर्माण नहीं, बल्कि बार-बार होने वाली मरम्मत और बारिश की चिंता से मुक्ति है।
इसी योजना का सहारा लेकर उदयपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत केशमा (वन केशमा) में हुडकू राम/बिरझु और रतन साय/छन्दू ने अपने नवनिर्मित पक्के आवास में गृह प्रवेश किया। लंबे समय से सुरक्षित आवास की आवश्यकता  पूरी होने पर दोनों परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई।
पक्का आवास मिलने से इन परिवारों को मौसम की कठिन परिस्थितियों से सुरक्षा के साथ रहने के लिए बेहतर और सुविधाजनक स्थान मिला है। उनके लिए यह सुरक्षा, स्थायित्व और सम्मान की नई शुरुआत है।

उल्लेखनीय है कि गरीब और बेघर परिवारों के लिए आवास की कमी का असर केवल रहने की जगह तक सीमित नहीं रहता। कच्चे या असुरक्षित मकान में रहने वाले परिवारों को बारिश में छत और दीवारों के क्षतिग्रस्त होने, गर्मी में अत्यधिक तापमान तथा सर्दियों में ठंडी हवाओं से बचाव की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
ऐसे घरों में बच्चों के लिए पढ़ाई का अनुकूल वातावरण बनाना भी कठिन होता है। बारिश के दौरान घर में पानी आने, पर्याप्त रोशनी या सुरक्षित स्थान की कमी जैसी परिस्थितियां उनकी पढ़ाई और दिनचर्या को प्रभावित कर सकती हैं। सुरक्षित और स्थायी आवास मिलने से बच्चों को पढ़ने के लिए बेहतर वातावरण और नियमित दिनचर्या मिलती है।

पीएम आवास से महिलाओं के लिए बढ़ी सुरक्षा और सुविधा
आवास का सीधा लाभ परिवार की महिलाओं को भी मिलता है। असुरक्षित घर में रहने के दौरान दरवाजे, छत और दीवारों की मजबूती को लेकर चिंता बनी रहती है। पक्का आवास महिलाओं को अधिक सुरक्षित और निजी रहने का स्थान उपलब्ध कराता है।
घर में पानी, बिजली, शौचालय जैसी अन्य मूलभूत सुविधाओं का समुचित समावेश होने पर महिलाओं का घरेलू श्रम भी कम हो सकता है। बारिश और खराब मौसम के दौरान परिवार की सुरक्षा को लेकर उनकी चिंता कम होती है और बच्चों तथा घर के अन्य सदस्यों की देखभाल अधिक सुरक्षित वातावरण में हो पाती है।

स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित वातावरण

असुरक्षित और नमी वाले मकानों में बारिश के दौरान सीलन और गंदगी की समस्या उत्पन्न हो सकती है। ठंड के मौसम में पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलने तथा गर्मियों में अत्यधिक गर्मी का असर परिवार के स्वास्थ्य और आराम पर पड़ सकता है। पक्का और बेहतर संरक्षित आवास परिवार को मौसम के प्रतिकूल प्रभावों से बचाने में मदद करता है। स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित आवास के साथ शौचालय, पेयजल और बिजली जैसी सुविधाएं जुड़ने पर परिवार के स्वास्थ्य एवं जीवन-स्तर में समग्र सुधार की संभावनाएं बढ़ती हैं।

आवास से मजबूत होती है बच्चों के भविष्य की नींव

जब परिवार के पास सुरक्षित घर होता है तो बच्चों के लिए पढ़ाई का एक निश्चित स्थान और वातावरण बनता है। बारिश में किताब-कॉपियों को सुरक्षित रखने से लेकर रात में रोशनी में पढ़ने तक, घर की बुनियादी सुविधाएं उनकी पढ़ाई को आसान बनाती हैं। सुरक्षित आवास बच्चों के मन में भी स्थायित्व और बेहतर भविष्य की उम्मीद पैदा करता है।

एक घर, कई बदलाव
मोहन राम, मोटू राम, हुडकू राम और रतन साय जैसे परिवारों की कहानी यह बताती है कि पक्का आवास किसी परिवार के लिए केवल भवन निर्माण की उपलब्धि नहीं है। यह मौसम से सुरक्षा, बच्चों के लिए बेहतर वातावरण, महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थान, स्वास्थ्य के लिए बेहतर परिस्थितियां और परिवार के लिए सामाजिक सम्मान से जुड़ा बदलाव है। पीएम जनमन का उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) तक आवास सहित बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। पहाड़ी कोरवा परिवारों के इन नवनिर्मित घरों में दिखाई देने वाली खुशी इस बदलाव की जमीनी तस्वीर प्रस्तुत करती हैकृजहां कभी परिवार सुरक्षित छत का सपना देखता था, वहीं आज उसी छत के नीचे उसके बच्चों के भविष्य के सपने आकार ले रहे हैं।

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