देशी गायों से शुरू हुआ सफर, उन्नत पशुपालन से सालाना कमाई पहुंची 10  लाख रुपए तक

सारंगढ़-बिलाईगढ़, 21 सितंबर 2026/sns/- सेवा संकल्प अभियान के तहत शासकीय योजनाओं से लोगों के जीवन में आए बदलाव और आत्मनिर्भरता की कहानियां सामने आ रही हैं। सारंगढ़ तहसील के ग्राम खुड़डेना, ग्राम पंचायत बरदुला निवासी परदेशी लाल चंद्रा की कहानी भी ऐसे ही बदलाव की मिसाल है। कुछ वर्ष पहले 8 से 10 देशी गायों से प्रतिदिन केवल 15 से 20 लीटर दूध का उत्पादन करने वाले परदेशी लाल आज उन्नत पशुपालन के माध्यम से सालाना करीब 10 लाख रुपए तक की आय अर्जित कर रहे हैं। पशुपालन विभाग की योजनाओं, कृत्रिम गर्भाधान से नस्ल सुधार, पशुधन बीमा और बेहतर पोषण की सुविधाओं ने उनके पारंपरिक पशुपालन को व्यवस्थित डेयरी व्यवसाय में बदल दिया है।
पहले देशी नस्ल की गायों से कम दूध उत्पादन होने के कारण पशुपालन से होने वाली आमदनी भी सीमित थी। पशुओं की आकस्मिक मृत्यु होने पर परिवार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। ऐसे समय में राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम से मिले सहयोग ने उनके पशुपालन व्यवसाय की दिशा बदल दी। कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से पशुओं की नस्ल में सुधार हुआ और धीरे-धीरे उनके पास उच्च दुग्ध उत्पादन क्षमता वाली एचएफ क्रॉसब्रीड गायें तैयार हुईं।
आज परदेशी लाल चंद्रा के पास 6 उच्च उत्पादक एचएफ क्रॉसब्रीड गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन करीब 65 से 70 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। वे उत्पादित दूध को स्थानीय निजी होटलों और उपभोक्ताओं को लगभग 40 रुपए प्रति लीटर की दर से बेचते हैं। इससे उन्हें प्रतिदिन करीब 2,600 से 2,800 रुपए की आमदनी होती है। दूध बिक्री से उनकी मासिक आय लगभग 78 हजार से 84 हजार रुपए और वार्षिक आय करीब 9.36 लाख से 10.08 लाख रुपए तक पहुंच गई है। इस बढ़ी हुई आय से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और पशुपालन अब उनकी मुख्य आजीविका बन गया है।
नस्ल सुधार से भविष्य की आय का भी तैयार हुआ आधार
परदेशी लाल चंद्रा की एचएफ क्रॉसब्रीड गायों से वर्तमान में 2 एचएफ क्रॉस बछिया, 2 जर्सी क्रॉस बछिया और 2 साहीवाल क्रॉस बछिया प्राप्त हुई हैं। इन बछियों के पालन-पोषण से उनके डेयरी व्यवसाय को भविष्य के लिए भी मजबूती मिल रही है। उन्नत नस्ल की इन बछियों के बेहतर विकास से आने वाले समय में दूध उत्पादन और आय बढ़ने की संभावनाएं बनी हैं।

पशुधन बीमा ने कम किया आर्थिक जोखिम

पशुपालन में होने वाले जोखिम को कम करने के लिए परदेशी लाल चंद्रा ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत पशुधन बीमा योजना का भी लाभ लिया है। योजना के तहत उनके पशुओं का 60 हजार रुपए प्रति पशु तक का बीमा तीन वर्षों के लिए कराया गया है, जिसके लिए प्रति पशु 585 रुपए का प्रीमियम निर्धारित है। पशुधन बीमा से आकस्मिक परिस्थितियों में होने वाले आर्थिक नुकसान से सुरक्षा मिली है और परिवार को अतिरिक्त आर्थिक संबल प्राप्त हुआ है।

बेहतर पोषण से उन्नत बछियों के विकास को मिला सहारा

उन्नत मादा वत्स पालन योजना के अंतर्गत भी परदेशी लाल चंद्रा का चयन किया गया है। योजना के तहत उन्हें लगभग 19,500 रुपए मूल्य का उच्च गुणवत्ता वाला संतुलित पशु आहार उपलब्ध कराया जाएगा, जिसमें हितग्राही को केवल 4,500 रुपए का अंशदान देना है। इससे बछियों के बेहतर पोषण और विकास में मदद मिलेगी तथा भविष्य में उनकी दुग्ध उत्पादन क्षमता को बढ़ाने का आधार तैयार होगा।

दूध के साथ गोबर भी बना अतिरिक्त आमदनी का साधन

परदेशी लाल ने पशुपालन से होने वाली आय को केवल दूध बिक्री तक सीमित नहीं रखा है। पशुओं से प्राप्त गोबर से तैयार जैविक खाद भी उनके लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया बनी है। स्थानीय किसान जैविक खाद खरीदते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। साथ ही जैविक खाद के उपयोग से कृषि भूमि की उर्वरता बनाए रखने और रासायनिक उर्वरकों पर होने वाले खर्च को कम करने में भी मदद मिलती है।
परदेशी लाल चंद्रा बताते हैं कि पहले पशुपालन उनके परिवार के लिए केवल सहायक आय का साधन था, लेकिन आज यही उनकी मुख्य आर्थिक गतिविधि बन चुका है। कृत्रिम गर्भाधान से नस्ल सुधार, विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन, पशुधन बीमा, बेहतर पोषण और शासकीय योजनाओं का लाभ मिलने से उन्हें पशुपालन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिली है।

सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से सामने आ रही यह ‘बदलाव की कहानी’ बताती है कि जब शासकीय योजनाओं का लाभ सही हितग्राही तक पहुंचता है और हितग्राही उसका बेहतर उपयोग करता है, तो पारंपरिक आजीविका भी आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन सकती है।

About The Author