मनरेगा से संवरा किसान का भविष्य
जगदलपुरए, 26 सितंबर 2026/sns/- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) ग्रामीण अंचलों में आजीविका संवर्धन और जल संरक्षण की दिशा में निरंतर प्रभावी भूमिका निभा रहा है। इसी कड़ी में बस्तर जिले के विकासखंड बकावंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कोसमी में मनरेगा के तहत निर्मित एक डबरी स्थानीय किसान के जीवन में नई खुशहाली लेकर आई है।
ग्राम कोसमी निवासी किसान अनुज पिता रामसिंह के परिवार का जीवन पूरी तरह खेती-किसानी पर ही निर्भर रहा है। पहले उनके खेत में वर्षा जल को सहेजने का कोई साधन उपलब्ध नहीं था। इस कारण बरसात का पानी बहकर व्यर्थ चला जाता था और मानसून बीतते ही खेतों में नमी की भारी कमी होने लगती थी। सिंचाई का कोई स्थायी प्रबंध न होने से उन्हें फसल उत्पादन के लिए केवल मौसमी बारिश पर ही आश्रित रहना पड़ता था, जिससे अक्सर फसलों को नुकसान उठाना पड़ता था।
किसान की इस समस्या को दूर करने के लिए मनरेगा योजना के अंतर्गत लगभग दो लाख 98 हजार रूपए की लागत से 25×25 मीटर आकार की डबरी निर्माण कार्य को मंजूरी दी गई। 05 जनवरी 2025 को शुरू हुआ यह निर्माण कार्य 19 अप्रैल 2025 को सफलता से पूरा कर लिया गया, जिसके माध्यम से स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों को 750 से अधिक मानव दिवस का सीधा रोजगार भी मिला।
डबरी के निर्माण के साथ ही वर्षा का पानी सीधे किसान के खेत के पास ही संचित होने लगा है। इस स्थायी जल संरचना ने न केवल खेत की मिट्टी में नमी के स्तर को बनाए रखा है, बल्कि जरूरत के समय फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी भी सुलभ कराया है। कृषि कार्यों के अलावा अब मवेशियों के लिए भी पानी की व्यवस्था आसान हो गई है।
अपनी खुशी व्यक्त करते हुए लाभार्थी किसान अनुज ने बताया कि डबरी बन जाने से अब बरसात का पानी सीधे उनके खेत के समीप रुकता है, जिससे खेती के लिए पानी की बेहतर व्यवस्था हो सकी है और उन्हें आगामी फसलों के लिए नई उम्मीद व हौसला मिला है। उन्होने बताया कि अब रबी सीजन में डबरी से सिंचाई कर साग-सब्जी की खेती करेंगे और अपनी अतिरिक्त आय में बढोतरी कर सकेंगे।
कोसमी में हुआ यह प्रयास मात्र एक डबरी का निर्माण न होकर जल संरक्षण के जरिए कृषि में स्थायित्व लाने और ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम साबित हुआ है।