जनसेवा से जनकल्याण तकरू सुशासन के संकल्प से बदल रही छत्तीसगढ़ की तस्वीर

अम्बिकापुर, 03 अक्टूबर 2026/sns/- आसान होता है आमजनों का जीवन , जब शासकीय योजनाएं कागज से निकलकर जीवन का हिस्सा बनती हैं। यही जनसेवा की सबसे सार्थक तस्वीर है। विकास का अर्थ केवल बड़े निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है। विकास तब व्यापक बनता है जब उसका लाभ गांव, गरीब, किसान, महिला, बच्चा, युवा, पशुपालन और दूरस्थ क्षेत्र में रहने वाले परिवार तक पहुंचे। सरकार और नागरिक के बीच विश्वास तभी मजबूत होता है जब नागरिक को यह अनुभव हो कि उसकी जरूरत को समझा जा रहा है, उसकी समस्या सुनी जा रही है और उसके जीवन को बेहतर बनाने के लिए व्यवस्था काम कर रही है।यह तभी संभव होता है जब शासन सिर्फ शासन नहीं बल्कि सुशासन हो।

सुशासन की वास्तविक पहचान केवल योजनाओं की संख्या से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि उन योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक कितनी सहजता से पहुंच रहा है और उसके जीवन में कितना सार्थक बदलाव ला रहा है। छत्तीसगढ़ में शासन की जनकल्याणकारी पहलों को इसी दृष्टि से देखा जा सकता है, जहां विकास का केंद्र नागरिक है और योजनाओं का उद्देश्य केवल सहायता देना नहीं, बल्कि लोगों को सुरक्षित, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना है।
एक गरीब परिवार को पक्का घर मिलना, किसी महिला को अपनी आय का साधन मिलना, किसी किसान के खेत तक सिंचाई पहुंचना, किसी बच्चे को कुपोषण से बाहर निकालना, किसी विद्यार्थी की दस्तावेज संबंधी समस्या का समाधान होना या किसी नागरिक को अपनी शिकायत के लिए उचित मंच मिलनाकृये अलग-अलग घटनाएं दिखाई दे सकती हैं, लेकिन इनके पीछे जनसेवा की एक ही भावना काम करती है।
यही भावना ‘सेवा से सुशासन’ और ‘सुशासन से जनकल्याण’ की उस यात्रा को रेखांकित करती है, जिसमें शासन नागरिक के जीवन को आसान बनाने के लिए योजनाओं, तकनीक, प्रशासनिक व्यवस्था और मैदानी सेवाओं को एक-दूसरे से जोड़ रहा है।

कच्ची दीवारों से पक्के सपनों तक पहुंचता आवास

किसी परिवार के लिए अपना पक्का घर केवल ईंट, सीमेंट और छत का निर्माण नहीं होता। यह सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व का आधार होता है।
सरगुजा के पहाड़ी कोरवा परिवारों की जिंदगी में पीएम जनमन के माध्यम से आवास की सुविधा पहुंचने से इस बदलाव की तस्वीर दिखाई देती है। मोहन राम जैसे परिवार, जो लंबे समय तक कच्चे मकान में रहते हुए बारिश में टपकती छत और परिवार की सुरक्षा की चिंता से जूझते रहे, आज पक्के आवास के सहारे सुरक्षित जीवन की ओर बढ़ रहे हैं।
मोटू राम के लिए भी पक्का मकान बार-बार होने वाली लिपाई-पुताई और मरम्मत के खर्च से राहत का माध्यम बना है। उदयपुर क्षेत्र के हुडकू राम, बिरझु, रतन साय और छन्दू जैसे परिवारों के गृह प्रवेश में दिखाई देने वाली खुशी बताती है कि आवास किसी योजना की कागजी उपलब्धि नहीं, बल्कि परिवार के जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव है।

एक सुरक्षित घर बच्चों को पढ़ने का वातावरण देता है, महिलाओं को अधिक सुरक्षित और निजी स्थान देता है तथा परिवार को मौसम की कठिन परिस्थितियों से बचाव का आधार देता है। इस तरह आवास योजना का प्रभाव चार दीवारों से कहीं आगे जाकर परिवार के जीवन की गुणवत्ता से जुड़ता है।

छत्तीसगढ़ राज्य, जहां शासन की सेवाएं नागरिक के द्वार तक पहुंच रही हैं

आज शासन और नागरिक के बीच दूरी कम करने में डिजिटल तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। छत्तीसगढ़ का ‘सेवा सेतु’ इसी दिशा में विकसित किया जा रहा नागरिक-केंद्रित डिजिटल मंच है। इसका उद्देश्य विशेष रूप से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों सहित नागरिकों तक सरकारी सेवाओं और योजनाओं की पहुंच आसान बनाना है। ऑनलाइन आवेदन, आवेदन की स्थिति की ट्रैकिंग, डिजिटल प्रमाणपत्र, फत् आधारित सत्यापन तथा डिजिटल माध्यम से सूचना उपलब्ध कराने जैसी सुविधाएं इस प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने में सहायक हैं।
अम्बिकापुर की डॉली गंधर का उदाहरण बताता है कि दस्तावेज में एक छोटी-सी त्रुटि भी बैंकिंग और छात्रवृत्ति जैसी आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच में बाधा बन सकती है। सेवा सेतु के माध्यम से समस्या का निराकरण होने पर उनके लिए आगे की प्रक्रिया आसान हुई।
इसका महत्व केवल एक दस्तावेज सुधार तक सीमित नहीं है। यह उस सोच को सामने लाता है जिसमें नागरिक को समाधान के लिए बार-बार अलग-अलग कार्यालयों में भटकने के बजाय एक व्यवस्थित सेवा तंत्र उपलब्ध कराया जा रहा है।
इसी तरह सीएम हेल्पलाइन 1076 जैसी व्यवस्था नागरिकों को अपनी समस्या शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का माध्यम देती है। सरगुजा की छात्रा आराधना सिंह के आधार कार्ड में जन्मतिथि सुधार का मामला इसका उदाहरण है। दस्तावेज संबंधी समस्या दूर होने से उनके लिए उच्च शिक्षा और भविष्य की प्रक्रियाओं का मार्ग सुगम हुआ।
इस तरह डिजिटल सेवा और शिकायत समाधान की व्यवस्थाएं केवल तकनीकी व्यवस्था नहीं हैं वे नागरिक और शासन के बीच संवाद को मजबूत करने का माध्यम बन रही हैं।

महिला के हाथ में आर्थिक सहयोग, परिवार के भविष्य में नई उम्मीद

महिला सशक्तिकरण किसी भी समाज के समग्र विकास का महत्वपूर्ण आधार है। छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।  हर माह मिलने वाली सहायता से महिलाएं अपनी और परिवार की प्राथमिक जरूरतों में सहयोग कर सकती हैं। बच्चों की शैक्षणिक सामग्री, पोषण, घरेलू आवश्यकताओं या छोटे स्वरोजगार से जुड़ी जरूरतों में यह सहायता उपयोगी हो सकती है।
सरगुजा की राखी की कहानी इस मानवीय पक्ष को सामने लाती है। कठिन पारिवारिक परिस्थिति के बाद दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी संभालते हुए वे खेती के साथ सिलाई का काम कर रही हैं और योजना से मिलने वाली सहायता का उपयोग बच्चों के पोषण तथा सिलाई सामग्री के लिए करती हैं।
यहां योजना की राशि से अधिक महत्वपूर्ण वह आर्थिक निर्णय लेने का अवसर है, जो महिला को अपने परिवार की जरूरतों के संबंध में मिलता है।

बिहान से आत्मनिर्भरता और ‘लखपति दीदी’ तक का सफर

महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को स्थायी आधार देने में स्व-सहायता समूहों की भूमिका महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के माध्यम से महिलाएं बचत, ऋण, प्रशिक्षण और विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़ रही हैं।
अम्बिकापुर की कल्पना सिंह ने कृषि के लिए ऋण लेकर खीरा, बैंगन, टमाटर, तरबूज और अन्य फसलों की खेती को आगे बढ़ाया। खेती के साथ उनके भीतर बैंक, बाजार और आर्थिक गतिविधियों को लेकर आत्मविश्वास भी बढ़ा।
उदयपुर की मति बाई ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर मुर्गी पालन को व्यवसाय बनाया। कभी मजदूरी पर निर्भर रहने वाला परिवार आज अपनी आय के एक अतिरिक्त साधन के साथ आगे बढ़ रहा है।
सरगुजा में ‘छेरी बैंक’ जैसे नवाचार भी महिलाओं को पशुपालन आधारित आजीविका से जोड़ने की दिशा में प्रयास हैं, जिसमें नकद ऋण के स्थान पर बकरियां उपलब्ध कराकर मेमनों के रूप में वापसी की व्यवस्था की गई है।
‘लखपति दीदी’ की कहानियां इस बात को रेखांकित करती हैं कि जब महिला को संगठन, प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और बाजार से जुड़ने का अवसर मिलता है तो वह परिवार की आय में योगदान देने के साथ स्वयं निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी विकसित करती है। सरगुजा की मति बाई और अन्य महिलाओं की सफलता इसी बदलाव की स्थानीय तस्वीर प्रस्तुत करती है।

कुपोषण से सुपोषण तक-बचपन को वापस लाने की कोशिश
जनकल्याण का सबसे संवेदनशील पक्ष बच्चों का स्वास्थ्य है। सरगुजा के शासकीय रघुनाथ जिला चिकित्सालय, अम्बिकापुर में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के उपचार और पोषण पुनर्वास की दिशा में काम कर रहा है।
शिवाशी, रश्मि, प्रतीक और युवराज जैसे बच्चों के उपचार के दौरान दर्ज वजन में वृद्धि केवल आंकड़ा नहीं है। यह उपचार, पोषण और देखभाल के माध्यम से स्वास्थ्य की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत है। हालांकि किसी बच्चे के संपूर्ण स्वास्थ्य का आकलन केवल वजन से नहीं किया जा सकता, लेकिन नियमित निगरानी और उपचार से सुधार की संभावना का यह महत्वपूर्ण संकेत जरूर है।
कुपोषण से लड़ाई अस्पताल तक सीमित नहीं रहती। बच्चे के उपचार के साथ परिवार को उचित पोषण, स्वच्छता, स्तनपान, पूरक आहार और नियमित वृद्धि निगरानी की जानकारी देना भी जरूरी है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, आंगनबाड़ी और परिवार के बीच समन्वय इस प्रयास को अधिक प्रभावी बनाता है।
एक स्वस्थ बच्चा केवल बीमारी से मुक्त बच्चा नहीं होता। वह खेल सकता है, सीख सकता है, स्कूल जा सकता है और अपने सपनों को आकार देने की क्षमता विकसित कर सकता है। इसलिए सुपोषण में निवेश वास्तव में आने वाली पीढ़ी के भविष्य में निवेश है।

पशुधन से ग्रामीण परिवारों की आय को मिला आधार

ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुपालन आज भी बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब पारंपरिक पशुपालन को वैज्ञानिक तकनीक, नस्ल सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं और शासकीय योजनाओं का सहयोग मिलता है तो इसकी आर्थिक क्षमता बढ़ सकती है।
सीतापुर विकासखंड के दयासागर ने पशुपालन विभाग की सलाह से कृत्रिम गर्भाधान और नस्ल सुधार को अपनाया। बेहतर नस्ल, पशु पोषण और देखभाल पर ध्यान देने से उनके यहां दुग्ध उत्पादन बढ़ा और पशुपालन से नियमित आय की संभावना मजबूत हुई।
लुंड्रा के जयनाथ राम को राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत बकरियां और बकरा उपलब्ध कराया गया। उन्होंने बकरी पालन को आगे बढ़ाकर इसे आय का साधन बनाया।
इस प्रकार सरकारी सहायता तभी स्थायी परिणाम का आधार बनती है जब उसके साथ हितग्राही की मेहनत, तकनीकी मार्गदर्शन और उचित प्रबंधन जुड़ता है।
अन्नदाता के खेत से समृद्धि की नई राह
ग्रामीण विकास की तस्वीर कृषि के बिना पूरी नहीं हो सकती। किसान की आय और खेती की उत्पादकता बढ़ाने के लिए सिंचाई, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य, कृषि विविधीकरण और बाजार व्यवस्था का मजबूत होना आवश्यक है।
सरगुजा में सौर सुजला योजना के माध्यम से हजारों किसानों को सौर सिंचाई पंप का लाभ मिला है। इससे वर्षभर सिंचाई और द्विफसली तथा बहुफसली खेती की संभावनाएं बढ़ी हैं।
लबेद सिंह जैसे किसान सौर सिंचाई के आधार पर धान के साथ दलहन, तिलहन, सब्जियां, फलदार पौधे, फूल और मछली पालन जैसी गतिविधियों को जोड़ रहे हैं। यह कृषि विविधीकरण ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आय के वैकल्पिक रास्ते तैयार करने की संभावना दिखाता है।
इसी तरह मृदा परीक्षण के माध्यम से खेत की वास्तविक पोषण जरूरत समझकर उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देना, जल संरक्षण संरचनाओं के माध्यम से सिंचाई का आधार मजबूत करना और डबरी के जरिए खेती के साथ मछली पालन जोड़नाकृये सभी प्रयास खेती को अधिक वैज्ञानिक और विविध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

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