परंपरागत खेती से आगे बढ़े गोपाल एर्रागोला, आधुनिक खेती से सालाना करीब 4 लाख की शुद्ध आमदनी

बीजापुर, 04 अक्टूबर 2026/sns/- जिले के दूरस्थ अंचलों में किसान अब परंपरागत धान की खेती तक सीमित न रहकर फसल विविधीकरण और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा रहे हैं। विकासखण्ड उसूर (आवापल्ली) के ग्राम फुतकेल निवासी 47 वर्षीय कृषक श्री गोपाल एर्रागोला इसकी मिसाल बने हैं। कृषि विभाग एवं आत्मा योजना के मार्गदर्शन और विभिन्न शासकीय योजनाओं से मिली सहायता के बूते उन्होंने धान के साथ मूंगफली, मिर्च, सब्जी उत्पादन और मछली पालन को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है।
श्री गोपाल एर्रागोला के पास कुल 3.643 हेक्टेयर कृषि भूमि है। क्षेत्र के नक्सल प्रभावित होने और सिंचाई सुविधा सीमित होने के कारण शुरुआती दौर में खेती करना उनके लिए आसान नहीं था। वे मुख्य रूप से वर्षा आधारित धान की खेती करते थे। हालांकि उनका खेत तालपेरू नदी के किनारे होने तथा भूमि मूंगफली, रबी मक्का और मिर्च जैसी फसलों के लिए उपयुक्त होने के कारण कृषि विभाग ने उन्हें फसल विविधीकरण के लिए प्रेरित किया

तालपेरू नदी से सिंचाई सुविधा ने खोले उन्नत खेती के रास्ते- कृषि विभाग द्वारा सर्वे के बाद जिला प्रशासन के सहयोग से तालपेरू नदी के किनारे विद्युत विस्तार कराया गया। इससे खेत में पर्याप्त सिंचाई की व्यवस्था संभव हुई। विभागीय अधिकारियों ने नियमित भ्रमण, निरीक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन के जरिए श्री एर्रागोला को व्यावसायिक खेती और फसल चक्र अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। कृषि विभाग और आत्मा योजना से लगातार जुड़े रहने के कारण उन्होंने खेती के तौर-तरीकों में बदलाव किया। धान उत्पादन के साथ मूंगफली एवं मिर्च की व्यावसायिक खेती शुरू की। साथ ही सब्जी उत्पादन और मछली पालन को भी अतिरिक्त आय का जरिया बनाया।

6.10 लाख रुपये की सकल आय, 3.93 लाख रुपये से अधिक शुद्ध आमदनी- वर्ष 2025 में श्री एर्रागोला ने 1.821 हेक्टेयर में धान, 0.600 हेक्टेयर में मूंगफली और 1 हेक्टेयर में मिर्च की खेती की। धान से करीब 2 लाख 17 हजार रुपये, मूंगफली से 54 हजार रुपये और मिर्च से 2 लाख 79 हजार 500 रुपये की सकल आय प्राप्त हुई। इसके अतिरिक्त सब्जी उत्पादन से 35 हजार रुपये और मछली पालन से 25 हजार रुपये की आय हुई।
इस प्रकार कृषि एवं कृषि आधारित गतिविधियों से उनकी कुल सकल आय 6 लाख 10 हजार 500 रुपये रही। लगभग 2 लाख 16 हजार 750 रुपये की लागत के बाद उन्हें 3 लाख 93 हजार 750 रुपये की शुद्ध आमदनी प्राप्त हुई। इसमें अकेले मिर्च की खेती से लगभग 1 लाख 74 हजार 500 रुपये की शुद्ध आय हुई।

सरकारी योजनाओं से मिले संसाधनों ने खेती को बनाया आसान- श्री एर्रागोला को समय-समय पर कृषि एवं अन्य विभागों की योजनाओं का लाभ भी मिला। उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड, 3 हॉर्स पावर जेट पंप, नैपसेक स्प्रेयर, सोलर प्लेट, धान बीज एवं उर्वरक सहित विभिन्न कृषि संसाधन उपलब्ध कराए गए। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत उन्हें डीबीटी के माध्यम से सहायता मिली। नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत धान बीज, उर्वरक एवं भूमि जुताई के लिए एक हजार रुपये की सहायता राशि भी प्रदान की गई। माइक्रो इरिगेशन के माध्यम से टपक सिंचाई सुविधा ने सब्जी एवं अन्य फसलों के उत्पादन को और सुगम बनाया।

प्राकृतिक खेती की ओर भी बढ़ाए कदम- आधुनिक कृषि के साथ श्री एर्रागोला प्राकृतिक खेती की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। वर्ष 2025-26 में उनका चयन राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन योजना के क्लस्टर में किया गया। उन्होंने धान एवं मिर्च की खेती में जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे प्राकृतिक आदानों का उपयोग शुरू किया है। इससे खेती में रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। अपनी सफलता के बारे में श्री गोपाल एर्रागोला बताते हैं कि कृषि विभाग के अधिकारियों से मिले नियमित मार्गदर्शन और शासकीय योजनाओं के लाभ ने उनकी खेती का तरीका बदल दिया। धान के साथ मूंगफली, मिर्च और अन्य फसलों को अपनाने से उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर होने के साथ उनकी खेती देखकर गांव के अन्य किसान भी आधुनिक एवं व्यावसायिक खेती के प्रति रुचि दिखा रहे हैं। श्री एर्रागोला की सफलता यह बताती है कि सिंचाई सुविधा, तकनीकी मार्गदर्शन, फसल विविधीकरण और शासकीय योजनाओं का सही उपयोग कर दूरस्थ क्षेत्र के किसान भी खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल सकते हैं।

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