मध्यस्थता 3.0ः कैंपस मध्यस्थता प्रतियोगिताः संवाद, सहमति और न्याय तक पहुँच के महत्व पर जोर

दुर्ग, 17 अक्टूबर 2026/sns/- विवादों का समाधान हमेशा टकराव से नहीं, बल्कि संवाद, आपसी समझ और सहमति से भी संभव है। इसी विचार को युवा पीढ़ी तक पहुँचाने तथा मध्यस्थता को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से मध्यस्थता 3.0 के अंतर्गत कैंपस मध्यस्थता प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस पहल ने विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर दिया कि मध्यस्थता किस प्रकार विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
 प्रतियोगिता में 100 से अधिक विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया, जो युवाओं के बीच मध्यस्थता एवं वैकल्पिक विवाद समाधान के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाता है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के. विनोद कुजूर के मार्गदर्शन में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग एवं शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय (साइंस कॉलेज), दुर्ग के मनोविज्ञान विभाग के सहयोग से विद्यार्थियों के लिए मध्यस्थता 3.0 – कैंपस मध्यस्थता प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय (साइंस कॉलेज), दुर्ग के समान अवसर प्रकोष्ठ ने भी अपनी सहभागिता सुनिश्चित की। इस संयुक्त पहल ने न्यायपालिका, विधिक सेवा संस्थाओं और शैक्षणिक समुदाय के बीच समन्वय को एक सार्थक मंच प्रदान किया। यह आयोजन सर्वाेच्च न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति के मार्गदर्शन में 1 अगस्त से 31 दिसंबर 2026 तक संचालित राष्ट्रव्यापी मध्यस्थता 3.0 अभियान के अंतर्गत किया गया।
इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को मध्यस्थता की प्रक्रिया से परिचित कराना तथा विवादों के समाधान में संवाद, आपसी समझ और स्वैच्छिक सहमति के महत्व को रेखांकित करना था। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि मध्यस्थता किस प्रकार विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
कार्यक्रम में श्री के. विनोद कुजूर, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दुर्ग तथा अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग; प्रो. डॉ. संजय तिवारी, कुलपति, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग; डॉ. अजय सिंह, प्राचार्य; डॉ. अनिल कुमार पांडेय, कुलसचिव; तथा श्री अनीश दुबे, जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, दुर्ग, श्रीमती सुषमा लकड़ा, अध्यक्ष, स्थायी लोक अदालत, दुर्ग, श्री भूपेश कुमार बसंत, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, दुर्ग, श्री उमेश कुमार भागवतकर, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग, श्रीमती कामिनी जायसवाल, व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी, दुर्ग, श्रीमती ऐश्वर्या दीवान, व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी, दुर्ग की गरिमामयी उपस्थिति रही।
अपने संबोधन में श्री के. विनोद कुजूर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दुर्ग तथा अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग ने विद्यार्थी जीवन के अनुभव साझा करते हुए युवाओं के बीच मध्यस्थता के प्रति जागरूकता विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता हमारी सामाजिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा रही है और वर्तमान पीढ़ी इस परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों को संवाद, आपसी समझ और मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान की संस्कृति अपनाने के लिए प्रेरित किया।
प्रो. डॉ. संजय तिवारी, कुलपति, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग ने भी अपने संबोधन में मध्यस्थता एवं वैकल्पिक विवाद समाधान के महत्व पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने इस प्रकार की शैक्षणिक पहलों में विद्यार्थियों की सहभागिता तथा विश्वविद्यालय और न्यायिक संस्थाओं के बीच समन्वय के महत्व को रेखांकित किया।

‘तारीख पर तारीख’ से सहमति आधारित न्याय तक

श्री अनीश दुबे जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, दुर्ग ने अपने संबोधन की शुरुआत प्रसिद्ध फिल्मी संवाद “तारीख पर तारीख” से करते हुए न्यायिक प्रक्रिया में होने वाले विलंब की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने न्यायालयों में लंबित मामलों की बड़ी संख्या और सीमित न्यायिक संसाधनों के कारण उत्पन्न चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय लोक अदालतें लंबित मामलों के निपटारे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं तथा मध्यस्थता 3.0 भी विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

मनोविज्ञान और मध्यस्थताः विवाद के पीछे छिपे मानवीय पक्ष को समझना

कार्यक्रम में मध्यस्थता की प्रक्रिया में मनोविज्ञान की भूमिका को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया। मानवीय व्यवहार, भावनाओं, संवाद और पारस्परिक संबंधों की समझ विवादों के मूल कारणों को पहचानने तथा रचनात्मक बातचीत को आगे बढ़ाने में सहायक होती है। विद्यार्थियों के लिए मध्यस्थता का अनुभव सक्रिय श्रवण, सहानुभूति, प्रभावी बातचीत, समझौते की क्षमता, तार्किक चिंतन और विवाद प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण कौशल विकसित करने का अवसर रहा। ये कौशल न केवल उनके भावी व्यावसायिक जीवन, बल्कि व्यक्तिगत और सामाजिक संबंधों में भी उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं।

प्रतियोगिता में विद्यार्थियों का उत्साहपूर्ण प्रदर्शन

प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने समूह एवं व्यक्तिगत स्पर्धाओं के माध्यम से संवाद, बातचीत और सहमति निर्माण से संबंधित अपनी क्षमताओं का शानदार प्रदर्शन किया। परिणाम इस प्रकार रहेः- समूह प्रतियोगिता प्रथम पुरस्कार ग्रुप 8 यामिनी बघेल, नीता साहू, आदित्य कु. चंद्रपक्षी एवं मृणाल डप। द्वितीय पुरस्कार ग्रुप 5 कंचना कोषा, करुणा जैन, संध्या ठाकुर एवं अंजलि वर्मा। तृतीय पुरस्कार ग्रुप 2 श्रेया साहू, गरिमा साहू, ओमकुमारी एवं ध्यसंत साहू। स्नातक स्तर की व्यक्तिगत प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार मृणाल डप, द्वितीय पुरस्कार तोशी एवं तृतीय पुरस्कार श्लोक। स्नातकोत्तर स्तर की व्यक्तिगत प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार आशा, द्वितीय पुरस्कार अंजलि एवं तृतीय पुरस्कार नीतू शामिल है।

न्यायपालिका और शैक्षणिक संस्थानों की साझा पहल

मध्यस्थता 3.0 के अंतर्गत आयोजित इस कैंपस मध्यस्थता प्रतियोगिता ने युवा पीढ़ी के बीच मध्यस्थता के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा संवाद, आपसी समझ और स्वैच्छिक सहमति के माध्यम से विवादों के समाधान की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के महत्व को रेखांकित किया।
जिला न्यायपालिका, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग तथा शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग के समान अवसर प्रकोष्ठ की सहभागिता इस बात का परिचायक रही कि विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की संस्कृति विकसित करने में न्यायिक एवं शैक्षणिक संस्थान मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, मनोविज्ञान विभाग के शिक्षकगण, विद्यार्थीगण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी-कर्मचारी तथा पैरालीगल वॉलंटियर्स उपस्थित रहे।

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