स्वामित्व योजना से ग्रामीणों को मिल रहा अपनी जमीन का मालिकाना अधिकार, वर्षों पुरानी व्यवस्था में आया ऐतिहासिक बदलाव

स्वामित्व योजना से ग्रामीणों को मिल रहा अपनी जमीन का मालिकाना अधिकार, वर्षों पुरानी व्यवस्था में आया ऐतिहासिक बदलाव

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की पहल से ब्रिटिश काल से चली आ रही व्यवस्था में बदलाव, ग्रामीणों को मिल रही संपत्ति की कानूनी पहचान

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में रायपुर जिले के 372 गांवों में स्वामित्व योजना का क्रियान्वयन, 46 हजार 744 परिवारों को मिल चुके अधिकार अभिलेख

ड्रोन सर्वेक्षण और डिजिटल अभिलेखीकरण से ग्रामीण संपत्तियों को मिल रही नई पहचान, आर्थिक सुरक्षा और समृद्धि के खुल रहे द्वार

रायपुर, 20 अक्टूबर 2026/ वर्षों से अपने घर और जमीन पर निवास करने के बावजूद कानूनी दस्तावेजों के अभाव में असुरक्षा महसूस करने वाले ग्रामीणों के लिए स्वामित्व योजना आशा की नई किरण बनकर सामने आई है। अब गांवों में पीढ़ियों से आबादी भूमि पर निवास कर रहे परिवारों को उनकी आवासीय संपत्ति का अधिकार अभिलेख मिल रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित स्वामित्व योजना ग्रामीणों को उनकी संपत्ति की कानूनी पहचान प्रदान करने के साथ ही आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में रायपुर जिले में स्वामित्व योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। जिले के 372 गांवों में योजना के अंतर्गत कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब तक 46 हजार 744 परिवारों को अधिकार अभिलेखों का वितरण किया जा चुका है। जिला प्रशासन द्वारा शेष पात्र गांवों एवं परिवारों को भी योजना का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल से हजारों ग्रामीण परिवारों को उनकी आवासीय संपत्ति के स्वामित्व का प्रमाण मिल रहा है और वर्षों से चली आ रही अनिश्चितता दूर हो रही है।

उल्लेखनीय है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि पर निवास करने वाले परिवारों को लंबे समय से अपने मकान बनाकर रहने की सुविधा तो उपलब्ध थी, लेकिन उनकी आवासीय भूमि का व्यक्तिगत स्तर पर पृथक खसरा नंबर एवं स्वामित्व संबंधी अधिकार अभिलेख उपलब्ध नहीं होते थे। ब्रिटिश काल से चली आ रही इस व्यवस्था के कारण ग्रामीणों को अपनी ही आवासीय संपत्ति के स्वामित्व का वैधानिक प्रमाण प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।खसरा नंबर एवं स्वामित्व संबंधी अधिकार अभिलेख उपलब्ध नहीं होते थे। ब्रिटिश काल से चली आ रही इस व्यवस्था के कारण ग्रामीणों को अपनी ही आवासीय संपत्ति के स्वामित्व का वैधानिक प्रमाण प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वामित्व योजना के माध्यम से इस पुरानी व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव लाया गया है। आधुनिक ड्रोन तकनीक से ग्रामीण आबादी क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर संपत्तियों का सटीक सीमांकन एवं डिजिटल अभिलेखीकरण किया जा रहा है। इससे प्रत्येक पात्र संपत्ति स्वामी की पहचान सुनिश्चित कर उसे अधिकार अभिलेख प्रदान करने की व्यवस्था विकसित हुई है। छत्तीसगढ़ में भी इस महत्वाकांक्षी योजना का क्रियान्वयन तेजी से किया जा रहा है।

स्वामित्व योजना के अंतर्गत प्रदान किए जा रहे अधिकार अभिलेख ग्रामीण परिवारों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित हो रहे हैं। इससे उनकी आवासीय संपत्ति के स्वामित्व की पहचान स्पष्ट होगी। पात्र हितग्राही नियमानुसार इन दस्तावेजों का उपयोग बैंक ऋण एवं अन्य वित्तीय सुविधाएं प्राप्त करने के लिए भी कर सकेंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार, छोटे व्यवसाय एवं आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

इसके साथ ही संपत्ति के क्रय-विक्रय, उत्तराधिकार एवं अन्य संबंधित प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी। स्पष्ट स्वामित्व अभिलेख उपलब्ध होने से भूमि एवं संपत्ति संबंधी विवादों को कम करने में भी सहायता मिलेगी। इस प्रकार योजना केवल संपत्ति के दस्तावेज उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण परिवारों की आर्थिक सुरक्षा और भविष्य को मजबूत बनाने का भी माध्यम बन रही है।

स्वामित्व योजना के अंतर्गत आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में स्थित आवासीय संपत्तियों का ड्रोन सर्वेक्षण किया जा रहा है। इसके माध्यम से संपत्तियों की सीमाओं की पहचान कर डिजिटल नक्शे एवं अभिलेख तैयार किए जा रहे हैं। इससे संपत्तियों के स्वामित्व संबंधी जानकारी अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी हो रही है।

डिजिटल अभिलेखीकरण से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति से संबंधित जानकारी प्राप्त करने में सुविधा होगी। साथ ही राजस्व प्रशासन को भी संपत्तियों का व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध होगा।

रायपुर जिले में कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में स्वामित्व योजना सहित केंद्र एवं राज्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीण आबादी भूमि के सर्वेक्षण, अधिकार अभिलेख तैयार करने तथा पात्र परिवारों को उनका वितरण सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

स्वामित्व योजना से ग्रामीणों को उनकी पीढ़ियों पुरानी आवासीय संपत्ति का प्रामाणिक दस्तावेज उपलब्ध हो रहा है। इससे न केवल संपत्ति संबंधी अधिकारों को मजबूती मिल रही है, बल्कि ग्रामीण परिवारों में सुरक्षा और आत्मविश्वास की भावना भी बढ़ रही है।

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