कृषि विज्ञान केंद्र सुरगी द्वारा वर्षा पूर्वानुमान के दृष्टिगत किसानों को दी गई मौसम आधारित विशेष कृषि सलाह
राजनांदगांव, 27 अक्टूबर 2026/sns/- भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त मौसम पूर्वानुमान के अनुसार दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बनने के कारण बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती गतिविधियों के प्रभाव से मौसम में परिवर्तन होने की संभावना है। चक्रवात के प्रभाव से हवा की गति 115 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक होने की आशंका व्यक्त की गई है। छत्तीसगढ़ में 25 अक्टूबर से वर्षा की गतिविधियों में वृद्धि होने की संभावना है। 28 एवं 29 अक्टूबर 2026 को राजनांदगांव जिले सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में वर्षा होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी (64 से 115 मिमी) से अति भारी (115 से 204 मिमी) वर्षा हो सकती है। वर्षा के कारण रात्रि के तापमान में वृद्धि होने से आगामी कुछ दिनों तक ठंड का प्रभाव कम रहने की संभावना है।
कृषि विज्ञान केन्द्र सुरगी राजनांदगांव द्वारा वर्षा का पूर्वानुमान के दृष्टिगत किसानों को मौसम आधारित कृषि सलाह दी गई है। मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए किसान को धान, दलहन एवं तिलहन फसलों के पकने की अवस्था में होने पर आगामी 2-4 दिनों तक कटाई का कार्य स्थगित रखने की सलाह दी गई है। जिन किसानों ने फसलों की कटाई प्रारंभ कर दी है, वे कटी हुई फसलों को शीघ्र सुरक्षित एवं ढके हुए स्थानों पर रखें, ताकि वर्षा से होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। खेतों में जलभराव की स्थिति से बचने के लिए अतिरिक्त वर्षा जल की निकासी की समुचित व्यवस्था शीघ्र करें। किसान अपनी फसलों की नियमित निगरानी करें। कीट एवं रोग के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उचित कीटनाशक अथवा कवकनाशक का प्रयोग करें। उतेरा फसल के रूप में तिवड़ा अथवा अलसी की बुवाई करने वाले किसान मौसम अनुकूल होने तक बुवाई स्थगित रखें। रबी मौसम की फसलों की बुवाई खेतों में पर्याप्त नमी की स्थिति एवं मौसम अनुकूल होने पर नवंबर माह के प्रथम सप्ताह से प्रारंभ करें।
रबी मौसम की सब्जियों, जैसे फूलगोभी, ब्रोकली एवं चुकंदर तथा पछेती खीरा एवं करेला आदि की बुवाई नवंबर माह के प्रथम सप्ताह से मौसम एवं खेत की स्थिति अनुकूल होने पर प्रारंभ करें। चक्रवात के प्रभाव से तेज हवा एवं वर्षा की संभावना को देखते हुए करेला, लौकी तथा अन्य लतावर्गीय सब्जियों में उचित सहारा (स्टेकिंग) देने की व्यवस्था करें। जिन केले के पौधों में फूल एवं फल आ चुके हैं, उन्हें तेज हवा से गिरने से बचाने के लिए बांस अथवा अन्य उपयुक्त साधनों से सहारा दें। सब्जियों एवं फलदार पौधों में जलभराव न होने दें। खेतों से अतिरिक्त जल की निकासी की उचित व्यवस्था करें। फसलों में कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी करें। लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार आवश्यक नियंत्रण उपाय अपनाएं।
आगामी दिनों में वर्षा एवं तेज हवा की संभावना को देखते हुए पशुओं को सूखे, सुरक्षित एवं हवादार पशुशेड में रखें। पशुशेड में वर्षा का पानी प्रवेश न करने दें तथा जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखें। वज्रपात की स्थिति में पशुओं को चराने के लिए खुले स्थानों पर न ले जाएं तथा पेड़ों के नीचे आश्रय न लें। पशुओं के लिए पर्याप्त मात्रा में सूखे चारे, सुरक्षित पेयजल एवं आवश्यक आहार की व्यवस्था रखें। पशुओं को तेज हवा, जलभराव एवं प्रतिकूल मौसम से बचाने के लिए विशेष सावधानी बरतें।
कृषि विज्ञान केंद्र सुरगी राजनांदगांव की वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. गुंजन झा ने जिले के समस्त किसान से मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए अपनी फसलों, सब्जियों, फलदार पौधों एवं पशुधन की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है। कटाई की गई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखें, खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था करें तथा मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करें। किसी भी प्रकार की कृषि संबंधी समस्या होने पर कृषि विज्ञान केंद्र सुरगी के वैज्ञानिकों से संपर्क कर उचित मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते है।