आत्मनिर्भर पंचायतें, विकसित गांव’ के संकल्प को मिलेगी मजबूती, प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना को मंजूरी

मुंगेली, 29 अक्टूबर 2026/sns/- ग्राम पंचायतों को आत्मनिर्भर, सशक्त, जवाबदेह और बेहतर कार्य प्रदर्शन करने वाली स्थानीय स्वशासन संस्थाओं के रूप में विकसित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना को केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में मंजूरी दी गई है। इस योजना का उद्देश्य ग्राम पंचायतों की प्रशासनिक एवं वित्तीय क्षमता को मजबूत करना और उन्हें विकसित भारत 2047 के संकल्प के अनुरूप विकास कार्यों की प्रभावी योजना बनाने तथा क्रियान्वयन में सक्षम बनाना है।
योजना की अवधि वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्ष निर्धारित की गई है। इसके लिए कुल 7,395 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। योजना का दायरा देश के सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों तक होगा। इसमें संविधान के भाग-4 के दायरे से बाहर के क्षेत्रों में कार्यरत ग्रामीण स्थानीय शासन संस्थाओं को भी शामिल किया गया है। इसके माध्यम से देशभर में 2.78 लाख से अधिक ग्रामीण स्थानीय निकायों एवं पारंपरिक संस्थाओं को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है। साथ ही, लगभग 32 लाख निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा तथा पंचायतों के कार्यों से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी भी लाभान्वित होंगे।
योजना के तहत पंचायतों को उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करने, वित्त आयोग के अनुदान का प्रभावी प्रबंधन करने और स्वयं के राजस्व स्रोतों को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे पंचायतों की वित्तीय आत्मनिर्भरता बढ़ाने और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को गति देने में मदद मिलेगी। योजना में सहभागी शासन व्यवस्था पर विशेष जोर दिया गया है। ग्रामसभाओं को अधिक प्रभावी बनाने और ग्रामीणों में योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न जनसंपर्क एवं सहभागिता गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे विकास कार्यों की प्राथमिकताएं तय करने में स्थानीय नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
ग्राम पंचायत विकास योजनाओं में सतत विकास लक्ष्यों से जुड़े नौ स्थानीयकृत विषयों को शामिल किया जाएगा। विभिन्न विभागीय योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर पंचायत स्तर पर समग्र विकास की कार्ययोजना तैयार करने पर जोर रहेगा। इससे गांवों की जरूरतों के अनुरूप योजनाओं का क्रियान्वयन और विकसित भारत /2047 के लक्ष्य की दिशा में प्रगति को बल मिलेगा। योजना के अंतर्गत पंचायत-केंद्रित विभिन्न योजनाओं को एकीकृत डिजिटल मंच के माध्यम से जोड़ने, योजनाओं, हितग्राहियों और परिसंपत्तियों से संबंधित आंकड़ों के आधार पर विकास कार्यों की योजना बनाने तथा उनकी निगरानी को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। पंचायत प्रतिनिधियों की क्षमता वृद्धि के लिए प्रशिक्षण, क्षेत्रीय भाषाओं में अध्ययन सामग्री और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी प्रमुख विशेषताओं में शामिल है।
प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना का उद्देश्य पंचायतों को केवल प्रशासनिक इकाई तक सीमित न रखकर उन्हें स्थानीय विकास की प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह संस्था के रूप में स्थापित करना है। वित्तीय प्रबंधन, जनभागीदारी, डिजिटल शासन और क्षमता निर्माण पर केंद्रित यह पहल ग्रामीण स्वशासन को मजबूत करने तथा गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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