गुरू घासीदास के मानवतावादी दर्शन पर केंद्रित पुस्तक ‘युग प्रवर्तक गुरू घासीदास’ का रायपुर में भव्य विमोचन
गुरू घासीदास के मानवतावादी दर्शन पर केंद्रित पुस्तक ‘युग प्रवर्तक गुरू घासीदास’ का रायपुर में भव्य विमोचन
रायपुर, 05 नवंबर 2026/बाबा गुरू घासीदास जी के महान मानवतावादी दर्शन, सामाजिक समरसता, सत्य, समानता और सतनाम विचारधारा को वैश्विक स्तर पर प्रसारित करने के उद्देश्य से रचित पुस्तक ‘युग प्रवर्तक गुरू घासीदास सतनाम पंथ और अनुयायी’ का विमोचन एवं परिचर्चा समारोह न्यू राजेंद्र नगर, रायपुर स्थित मिनीमाता सभागार में अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। डॉ. उदयनाथ कुर्रे (प्राध्यापक आंग्ल विभाग, डॉ. इंद्रजीत सिंह शासकीय महाविद्यालय, अकलतरा) द्वारा लिखित यह महत्वपूर्ण ग्रंथ हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में अलग-अलग प्रकाशित किया गया है।
अकादमिक और वैश्विक दृष्टिकोण से सतनाम पंथ की प्रस्तुति
इस पुस्तक के माध्यम से गुरू घासीदास जी के विचारों, उनके ऐतिहासिक सामाजिक सुधार आंदोलन, सतनाम पंथ की वैचारिक पृष्ठभूमि तथा उनके अनुयायियों की भूमिका को अकादमिक, सामाजिक और वैश्विक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का सराहनीय प्रयास किया गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता अनुसूचित जाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष श्री के.पी. खण्डे ने की। इस अवसर पर साहित्य, शिक्षा, प्रशासनिक सेवा और सतनाम समाज से जुड़े कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष ऐतिहासिक महत्व प्रदान किया।
वक्ताओं के मुख्य विचार और संस्मरण
कार्यक्रम के आरंभ में लेखक डॉ. उदयनाथ कुर्रे ने स्वागत भाषण देते हुए अपनी लेखन यात्रा साझा की। उन्होंने कहा कि बाबा गुरू घासीदास के विचार किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज के लिए हैं। इस ग्रंथ के हिंदी व अंग्रेजी संस्करणों के जरिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पाठकों तक इन विचारों को प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकेगा। डॉ. प्यारे लाल आदिले प्राचार्य ने पुस्तक को एक समन्वयकारी अकादमिक संदर्भ ग्रंथ बताते हुए कहा कि यह शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए सामाजिक परिवर्तन और मानव समानता को समझने में बेहद उपयोगी सिद्ध होगी।
डॉ. श्यामलाल निराला ने इसे एक कालजयी कृति बताते हुए कहा कि यह वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देगी। प्रो. रामायण प्रसाद टंडन व प्रो. बी.के. पटेल ने वर्ष 1983 के बाद इस प्रकार के गद्यात्मक और अन्वेषणपरक ग्रंथ के प्रकाशन को ऐतिहासिक कदम बताया। श्री एल.एल. कोसले एवं श्री एस.एल. मात्रे ने सांगठनिक रूप से एकजुट होकर गुरु घासीदास जी के विचारों को सर्वसमाज तक विस्तारित करने का आह्वान किया। डॉ. दादूलाल जोशी ने आधार व्याख्यान देते हुए कहा कि यह ग्रंथ अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोधार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री प्रदान करेगा।
सफलतापूर्वक संपन्न हुआ आयोजन
कार्यक्रम का बेहद प्रभावी और सुव्यवस्थित संचालन सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. पी.डी. सोनकर ने किया। समारोह के अंत में उपस्थित अतिथियों को पुस्तक की प्रतियां भेंट की गईं। इस गरिमामय आयोजन ने गुरू घासीदास जी के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने और वैचारिक विमर्श को एक नई दिशा देने का कार्य किया है।
समारोह में प्रमुख रूप से गुरू घासीदास साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, रायपुर के महासचिव श्री जे.आर. सोनी, प्रगतिशील छत्तीसगढ़ सतनामी समाज के प्रदेश अध्यक्ष श्री एल.एल. कोसले, पूर्व न्यायाधीश श्री एस.एल. मात्रे, प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. दादूलाल जोशी, प्रो. बी.के. पटेल, डॉ. श्यामलाल निराला, डॉ. रामायण प्रसाद टंडन, डॉ. एम.आर. बंजारे, डॉ. प्यारे लाल आदिले, डॉ. पी.डी. सोनकर, डॉ. देवेन्द्र शुक्ल, पूर्व आईएएस श्री हेमन्त पहारे, श्री मोहन कुमार जोगी एवं श्री कमल कुर्रे सहित अनेक विद्वान, शिक्षाविद् और समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
