औद्योगिक विकास नीति 2024-30, रैम्प और इज ऑफ डूईंग बिजनेस पर संभाग स्तरीय कार्यशाला आयोजित
रायपुर, 03 अप्रैल 2025/sms/- सिविल लाईन, रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाऊस के कन्वेन्शन हॉल में औद्योगिक विकास नीति 2024-30, रैम्प तथा इज ऑफ डूईंग बिजनेस पर गुरूवार को संभाग स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह ने औद्योगिक विकास नीति 2024-30 पर शासन की मंशा तथा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये किये गये नवीन प्रावधानों पर विचार व्यक्त कर उद्योगपतियों को अधिक से अधिक निवेश के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि हमारी औद्योगिक नीति काफी अच्छी है, इसमें कई ऐसे प्रावधान है जो उद्योगों को बढ़ावा देने में सहयोगी है। ऐसी नीतियों से प्रदेश में सकारात्मक माहौल निर्मित होगा और उद्योग व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम में उपस्थित उद्योगपतियों से उन्होंने कहा कि आप हमारी नीति का प्रदेश से बाहर भी प्रचार-प्रसार करे और व्यापार का ऐसा वातावरण बनाए कि छत्तीसगढ़ में ज्यादा से ज्यादा निवेश हो। कलेक्टर ने कहा की प्रशासन और इंडस्ट्रीज सेक्टर मिलकर ऐसा कार्य करेंगे कि छत्तीसगढ़ की आर्थिक प्रगति तेजी से हो, युवाओं को रोजगार मिले और हमारे प्रदेश का नाम पूरे देश में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाए। औद्योगिक विकास के लिए आप सभी को प्रशासन स्तर पर हर संभव सहयोग किया जाएगा।
कार्यशाला का आयोजन रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह की अध्यक्षता, सीएसआईडीसी के कार्यपालक संचालक श्री आलोक त्रिवेदी व उद्योग संचालनालय से संयुक्त संचालक श्री शिव राठौर की उपस्थिति में किया गया। इस कार्यशाला में रायपुर संभाग में स्थापित उद्योगों के प्रतिनिधि और सीए प्रतिभागी के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यशाला में केंद्र सरकार द्वारा एमएसएमई उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये जारी रैम्प स्कीम की विस्तृत जानकारी ईवाय की टीम द्वारा दी गई। साथ ही राज्य की नवीन औद्योगिक विकास नीति 2024-30 पर विस्तृत परिचर्चा कर प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान किया गया।
इस कार्यशाला का आयोजन उद्योग विभाग द्वारा किया गया, जिसमें जिला व्यापार उद्योग केंद्र, रायपुर के मुख्य महाप्रबंधक के साथ गरियाबंद, धमतरी और महासमुंद के महाप्रबंधक उपस्थित रहे।
औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के विशेष प्रावधान
इस नीति के माध्यम से राज्य के युवाओं के लिए कौशलयुक्त रोजगारों का सृजन करते हुए अगले 5 वर्षों में 5 लाख नए औपचारिक क्षेत्रों में रोजगार का लक्ष्य रखा गया है।
इस नीति में स्थानीय श्रमिकों को औपचारिक रोजगार में परिवर्तित करने के लिए प्रशिक्षण कर प्रोत्साहन का प्रावधान करते हुए 1000 से अधिक रोजगार प्रदाय करने वाली इकाईयों को प्रोत्साहन के अतिरिक्त विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है।
नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान में सहभागिता के लिए अनुसूचित जाति/जनजाति, महिला उद्यमियों, सेवानिवृत्त अग्निवीर, भूतपूर्व सैनिकों (जिनमें पैरा मिलेट्री फोर्स भी सम्मिलित है), नक्सल प्रभावित, आत्म-समर्पित नक्सलियों एवं तृतीय लिंग के उद्यमों का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिए जाने का प्रावधान किया गया है।
औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की परिभाषा को भारत सरकार द्वारा परिभाषित एमएसएमई के अनुरुप किया गया है।
इस नीति के अंतर्गत युवा अग्निवीरों एवं नक्सल पीड़ित परिवारों को स्वयं के रोजगार धन्धे स्थापित करने पर विशेष अनुदान एवं छूट का प्रावधान किया है।
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवाओं को स्वयं का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए इन वर्गों के उद्यमियों को मात्र 1 रूपये प्रति एकड़ की दर पर औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि दी जा रही है।
औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में विशिष्ट श्रेणी के उद्योगों जैसे फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाईल, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण तथा गैर काष्ठ वनोपज प्रसंस्करण, कम्प्रेस्ड बॉयो गैस, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस (ए.आई), रोबोटिक्स एण्ड कम्प्यूटिंग (जी.पी.यू), आई.टी., आई.टी.ई.एस./डेटा सेंटर जैसे नवीन सेक्टरों के लिए विशेष पैकेज का प्रावधान है।