केतनपाल में जल जीवन मिशन बना बदलाव की धारा हर घर पहुंचा शुद्ध पेय जल पानी की समस्या से मिली

राहतबीजापुर, 09 जून 2026/sns/- भैरमगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत कोमपल्ली के आश्रित ग्राम केतनपाल में जल-जीवन मिशन ने ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक बदलाव की नई कहानी लिखी है। जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में अब प्रत्येक घर तक नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल की नियमित आपूर्ति हो रही है, जिससे वर्षों पुरानी जल समस्या का समाधान संभव हो पाया है। पूर्व में ग्राम केतनपाल में 14 हैंडपंपों के माध्यम से पेयजल की व्यवस्था थी। ग्रामीणों को पानी भरने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था तथा गर्मी, बारिश और सर्दी जैसे मौसमों में भी पानी जुटाने में काफी समय और श्रम लगाना पड़ता था। जल जीवन मिशन के अंतर्गत स्थापित 10 केएल क्षमता वाले 4 सोलर आधारित जल संरचनाओं के माध्यम से अब गांव के 109 परिवारों को घर-घर नल कनेक्शन द्वारा शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना के सुचारू संचालन एवं रखरखाव के लिए गांव से ही एक नल-जल मित्र का चयन किया गया है। उन्हें आवश्यक तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जिससे योजना से जुड़ी छोटी-बड़ी समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर ही किया जा सके।
ग्रामसभा के माध्यम से केतनपाल में शत-प्रतिशत ‘हर घर जल’ प्रमाणीकरण किया गया। इस अवसर पर सरपंच श्रीमती सोनी सोढ़ी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के परियोजना समन्वयक श्री इन्द्रबहादुर मंडावी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। ग्रामसभा में नल जल योजना के संचालन, रखरखाव, जल प्रदाय व्यवस्था और जल संरक्षण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। ग्रामीणों की सहमति से योजना के संचालन एवं संधारण के लिए प्रति परिवार 30 रुपये प्रतिमाह जलकर निर्धारित किया गया। ग्रामवासी सोमलू कुडियम बताते हैं कि पहले पानी के लिए काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। हैंडपंपों पर लंबी कतारें लगती थीं और पानी लाने में काफी समय व्यतीत होता था। अब घरों में नल से पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पेयजल उपलब्ध होने से उनकी सबसे बड़ी समस्या दूर हो गई है। ग्राम केतनपाल की यह उपलब्धि जल जीवन मिशन के “हर घर जल” संकल्प को साकार करने का उत्कृष्ट उदाहरण है। योजना ने न केवल ग्रामीणों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया है, बल्कि जल प्रबंधन और संरक्षण के प्रति सामुदायिक भागीदारी को भी मजबूत किया है। ग्राम पंचायत को जल आपूर्ति प्रणाली के संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपे जाने से ग्रामीणों में स्वामित्व की भावना विकसित हुई है और वे जल स्रोतों के संरक्षण में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।

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