दीदी के गोठ’ रेडियो कार्यक्रम का प्रथम वार्षिकोत्सव संपन्न
अम्बिकापुर, 09 जुलाई 2026/sns/- छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अभिनव पहल तथा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत संचालित रेडियो कार्यक्रम ‘दीदी के गोठ’ ने आज अपने सफल प्रसारण का एक वर्ष पूर्ण कर लिया। इस अवसर पर राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में राज्य स्तरीय वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया, वहीं जिला पंचायत सरगुजा के सभाकक्ष में संभागीय स्तरीय प्रसारण अनुश्रवण (Listening & Monitoring) कार्यक्रम आयोजित किया गया।
‘दीदी के गोठ’ कार्यक्रम का प्रसारण प्रत्येक माह के द्वितीय गुरुवार को दोपहर 2 बजे आकाशवाणी के सभी प्रादेशिक केंद्रों से किया जाता है। कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की सफल महिला सदस्य अपने संघर्ष, उपलब्धियों और आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानियां साझा करती हैं, जिससे प्रदेश की हजारों महिलाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है।
सरगुजा जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती निरूपा सिंह, उपाध्यक्ष श्री देवनारायण यादव, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती दिव्या सिसोदिया एवं श्रीमती राधा रवि सहित सरगुजा संभाग के विभिन्न जिलों से आईं ‘बिहान’ योजना की लखपति दीदियाँ उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम के दौरान सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से ‘दीदी के गोठ’ के 12वें एपिसोड का श्रवण किया। इसके पश्चात लखपति दीदियों ने अपने संघर्ष, चुनौतियों तथा ‘बिहान’ योजना से जुड़कर आर्थिक एवं सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की प्रेरक यात्राओं को साझा किया। जनप्रतिनिधियों ने महिलाओं की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्हें स्वरोजगार, नेतृत्व और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
सायंकाल रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह का मुख्यमंत्री एवं उप-मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा की गरिमामय उपस्थिति में सीधा प्रसारण देखा गया। इसके उपरांत जिला पंचायत सरगुजा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनय कुमार अग्रवाल ने प्रेरणादायी उद्बोधन देते हुए कहा कि ‘दीदी के गोठ’ केवल एक रेडियो कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास, स्वावलंबन और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन चुका है।कार्यक्रम का समापन महिला सशक्तिकरण, सामुदायिक नेतृत्व एवं ग्रामीण आजीविका को नई दिशा देने के संकल्प के साथ किया गया।