कौशल विकास प्रशिक्षण ने खोली आत्मनिर्भरता की राह

सुकमा, 12 अगस्त 2026/sns/-कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशानुसार डिप्टी कलेक्टर सुश्री मधु तेता की अध्यक्षता में कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विभाग, सुकमा के संयुक्त तत्वावधान में आत्मसमर्पित प्रशिक्षणार्थियों के लिए आयोजित 15 दिवसीय विशेष कौशल विकास प्रशिक्षण का समापन जिला पुनर्वास केंद्र में प्रमाण-पत्र वितरण के साथ हुआ। 22 जून से 14 जुलाई 2026 तक चले इस प्रशिक्षण में 25 प्रशिक्षणार्थियों ने सहभागिता की। उप संचालक कृषि श्री पी.आर. बघेल एवं कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख श्री राजेन्द्र प्रसाद कश्यप सहित अधिकारियों एवं वैज्ञानिकों ने प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
प्रशिक्षण के दौरान आत्मसमर्पित प्रशिक्षणार्थियों को प्राकृतिक खेती और कृषि आधारित आजीविका से जुड़े विभिन्न विषयों का सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र, नाडेप खाद एवं वर्मी कम्पोस्ट निर्माण, हरी खाद, गहरी जुताई, फलदार पौधों का रोपण, कृषि यंत्रों का उपयोग, बकरी एवं मुर्गी पालन, ऑयस्टर मशरूम उत्पादन, सब्जी नर्सरी, धान की कतार बुवाई और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों से प्रशिक्षणार्थियों को स्वरोजगार के व्यावहारिक अवसरों से परिचित कराया गया।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख श्री राजेन्द्र प्रसाद कश्यप ने प्राकृतिक खेती को कम लागत और स्थानीय संसाधनों पर आधारित टिकाऊ कृषि पद्धति बताते हुए प्रशिक्षणार्थियों को इसके माध्यम से खेती की लागत घटाने तथा मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने ऑयस्टर मशरूम उत्पादन को कम स्थान और सीमित संसाधनों में शुरू होने वाला लाभकारी कृषि उद्यम बताते हुए उत्पादन, स्वच्छता, देखभाल, कटाई एवं विपणन की जानकारी दी। प्रशिक्षणार्थियों ने भी प्रशिक्षण से मिले ज्ञान और आत्मविश्वास के आधार पर कृषि, मशरूम उत्पादन, पशुपालन, मुर्गी पालन एवं मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों के माध्यम से अपना स्वरोजगार शुरू करने का संकल्प लिया।
उप संचालक कृषि श्री पी.आर. बघेल ने कहा कि इस प्रकार के कौशल विकास प्रशिक्षण आत्मसमर्पित प्रशिक्षणार्थियों को नई दिशा देने, आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रशिक्षणार्थियों ने कहा कि प्राप्त ज्ञान, व्यावहारिक कौशल और प्रमाण-पत्र उनके रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए उपयोगी साबित होंगे। उन्होंने प्रशिक्षण आयोजित करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अर्जित कौशल को आजीविका का आधार बनाने का संकल्प दोहराया।

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