जिले में 24 अगस्त से शत-प्रतिशत लागू होगी ई-ऑफिस व्यवस्था
मुंगेली, 17 अगस्त 2026/sns/- शासन की मंशानुरूप शासकीय कार्यों में पारदर्शिता, गति और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में जिला प्रशासन ने डिजिटल प्रशासन की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार के निर्देशन में जिले के सभी शासकीय कार्यालयों में 24 अगस्त 2026 से ई-ऑफिस व्यवस्था शत-प्रतिशत लागू की जाएगी। इसके बाद नियमित शासकीय फाइलों का संचालन, परीक्षण, अनुमोदन एवं निराकरण पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा। ई-ऑफिस व्यवस्था लागू होने के साथ ही नियमित कार्यालयीन कार्यों में पारंपरिक कागजी एवं हार्ड बाउंड फाइलों के उपयोग को समाप्त किया जाएगा। वर्तमान सप्ताह के दौरान सभी कार्यालयों में लंबित कागजी फाइलों को डिजिटल प्रणाली में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार ने सभी कार्यालय प्रमुखों एवं संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि ई-ऑफिस को केवल औपचारिक व्यवस्था न मानते हुए इसे दैनिक शासकीय कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया है कि 24 अगस्त के बाद नियमित शासकीय कार्यवाही के लिए कागजी फाइलों के स्थान पर ई-ऑफिस प्रणाली का उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
कलेक्टर ने सभी कार्यालय प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि ई-ऑफिस संचालन से जुड़ी आवश्यक तैयारियां निर्धारित समय-सीमा में पूरी कर ली जाएं। संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों को प्रणाली के उपयोग में दक्ष बनाने के साथ लंबित फाइलों को डिजिटल प्रक्रिया में लाने की कार्यवाही भी पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी कार्यालय प्रमुखों को 22 अगस्त तक ई-ऑफिस व्यवस्था की तैयारियों की स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है, ताकि 24 अगस्त से जिले में शत-प्रतिशत डिजिटल फाइल संचालन सुनिश्चित किया जा सके।
09 हजार से अधिक फाइलों का हो चुका डिजिटल आदान-प्रदान
अतिरिक्त कलेक्टर श्रीमती निष्ठा पाण्डेय तिवारी ने बताया कि जिले में जून 2025 से ई-ऑफिस प्रणाली के उपयोग की शुरुआत की गई थी। इसके बाद अब तक 09 हजार 108 से अधिक फाइलों का ई-ऑफिस के माध्यम से डिजिटल आदान-प्रदान किया जा चुका है। वहीं 01 हजार 483 से अधिक अधिकारी-कर्मचारी ई-ऑफिस प्रणाली में ऑनबोर्ड हो चुके हैं।
फाइलों की निगरानी से बढ़ेगी जवाबदेही
ई-ऑफिस व्यवस्था लागू होने से फाइलों की स्थिति की ऑनलाइन निगरानी संभव होगी। इससे फाइलों के अनावश्यक लंबित रहने पर प्रभावी नियंत्रण रहेगा तथा अधिकारियों के स्तर पर समयबद्ध कार्यवाही और जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। डिजिटल रिकॉर्ड के कारण आवश्यक दस्तावेज एवं फाइलें आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी और रिकॉर्ड प्रबंधन भी अधिक सुरक्षित एवं व्यवस्थित होगा। इसके साथ ही कागज के उपयोग में कमी आने से पेपरलेस कार्यालय और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।