शिक्षकों के समर्पण से संवर रहा बच्चों का भविष्य, शिक्षक दिवस पर शिक्षकों का हुआ सम्मान

सुकमा, 05 सितम्बर 2026/sns/- शिक्षक दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालय स्थित शबरी ऑडिटोरियम में जिला स्तरीय शिक्षक दिवस समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ महतारी, मां सरस्वती, भारत माता एवं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। अतिथियों, शिक्षक-शिक्षिकाओं, छात्र-छात्राओं एवं पत्रकारों ने राज्य गीत, राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान का सामूहिक गायन किया। कार्यक्रम में महिला आयोग सदस्य सुश्री दीपिका सोरी, कलेक्टर श्री अमित कुमार, पुलिस अधीक्षक श्री मयंक गुर्जर, जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुंद ठाकुर, नगर पालिका अध्यक्ष श्री हूँगाराम मरकाम, जनपद अध्यक्ष सुकमा श्री संतोष इड़ो, जिला पंचायत सदस्य श्री हुंगाराम मरकाम, जनप्रतिनिधि श्री धनीराम बारसे सहित जिला एवं जनपद पंचायत सदस्य, शिक्षकगण एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
शिक्षा दिवस समारोह में सेवानिवृत्त शिक्षकों ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन, शैक्षणिक योगदान एवं उपलब्धियों को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहते, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, संस्कार और भविष्य को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिक्षा विभाग ने शिक्षक दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को देश के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
कलेक्टर श्री अमित कुमार ने सुकमा के दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा के लिए कार्य कर रहे शिक्षकों और शिक्षादूतों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि भौगोलिक एवं अन्य चुनौतियों के बावजूद शिक्षक दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचकर बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं और कई बार नदी-नालों को पार कर अपने विद्यालयों तक पहुंचते हैं। उन्होंने डॉ. राधाकृष्णन के साथ पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षकों को यह संकल्प लेना चाहिए कि सुकमा के बच्चे संभाग, छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश-विदेश में जिले का नाम रोशन करें। जनप्रतिनिधि श्री धनीराम बारसे ने कहा कि शिक्षक दिवस के इस पावन अवसर पर मैं जिले के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूँ। शिक्षक केवल बच्चों को किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व, संस्कार और भविष्य को आकार देते हैं। सुकमा जैसे चुनौतीपूर्ण और दूरस्थ जिले में हमारे शिक्षक कठिन परिस्थितियों के बावजूद अंदरूनी क्षेत्रों तक पहुंचकर बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन में शिक्षा को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।
पुलिस अधीक्षक श्री मयंक गुर्जर ने शिक्षक को समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया। उन्होंने संत कबीर के प्रसिद्ध दोहे “गुरु गोविंद दोऊ खड़े…” का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक बच्चों को विषयगत ज्ञान के साथ व्यक्तित्व, संस्कार और जीवन मूल्यों की शिक्षा देते हैं। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी शिक्षक दीपक की तरह शिक्षा का प्रकाश दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचा रहे हैं। जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुंद ठाकुर ने “गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु…” का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा ऐसा शक्तिशाली माध्यम है, जिससे व्यक्ति अपने साथ पूरे परिवार का जीवन बदल सकता है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए विभिन्न नवाचार किए जा रहे हैं और हरसंभव प्रयास जारी हैं। महिला आयोग सदस्य सुश्री दीपिका सोरी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए विद्यालयों में सुविधाओं और गुणवत्ता में लिए प्रयास कर रही है। हम सभी का दायित्व है कि हर बच्चे तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करें और ऐसा वातावरण तैयार करें, जहां सुकमा के बच्चे आगे बढ़कर जिले, छत्तीसगढ़ और देश का नाम रोशन करें। मैं जिले के सभी शिक्षकों के समर्पण और सेवा भावना को नमन करती हूँ और शिक्षक दिवस पर सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं देती हूँ।
समारोह के अंत में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शिक्षकों एवं सेवानिवृत्त शिक्षकों के योगदान को सम्मानित किया गया। शिक्षक दिवस का यह आयोजन दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में शिक्षा की जिम्मेदारी निभा रहे शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ उनके योगदान को सार्वजनिक रूप से रेखांकित करने का अवसर बना। इस अवसर पर नक्सल हिंसा में मारे गए शिक्षादूतों के परिवारों का भी सम्मान किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं, छात्र-छात्राएं, जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

About The Author