बिहान से हुई ग्रामीण महिलाओं के आत्मनिर्भरता की नई सुबह
अम्बिकापुर, 21 सितम्बर 2026/sns/- कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाएं आज अपने हुनर, मेहनत और आत्मविश्वास से परिवार की आर्थिक मजबूती की आधारशिला बन रही हैं। कल तक जिन हाथों में केवल घर-गृहस्थी की जिम्मेदारियां थीं, उन्हीं हाथों ने आज खेती की मिट्टी को समृद्धि में बदलना, मुर्गी पालन को व्यवसाय बनाना और छोटे-छोटे प्रयासों को स्थायी आय का साधन बनाना सीख लिया है। यह बदलाव केवल आमदनी बढ़ने की कहानी नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं के आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और सामाजिक पहचान के मजबूत होने की कहानी भी है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के माध्यम से स्व सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं अपने जीवन में बदलाव की नई इबारत लिख रही हैं। समूह के माध्यम से उन्हें बचत, ऋण, प्रशिक्षण और आजीविका गतिविधियों से जुड़ने के अवसर मिल रहे हैं। इन अवसरों को अपनी मेहनत और लगन से परिणाम में बदलते हुए अनेक महिलाएं आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी नई पहचान बना रही हैं
छोटी बचत से बड़े सपनों तक
ग्रामीण परिवारों में सीमित आय के बीच महिलाओं की भूमिका लंबे समय तक परिवार संभालने तक सीमित मानी जाती रही। ऐसे परिवारों में छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी दूसरों पर निर्भरता रहती थी। बिहान से जुड़ने के बाद महिलाओं को समूह के रूप में संगठित होने का अवसर मिला। नियमित बचत ने उनमें आर्थिक अनुशासन पैदा किया और समूह की सामूहिक शक्ति ने उन्हें ऋण तथा आजीविका गतिविधियों के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया।
यही छोटी शुरुआत धीरे-धीरे बड़े बदलाव का आधार बनी। किसी ने खेती को चुना, किसी ने सब्जी उत्पादन शुरू किया, किसी ने मुर्गी पालन को व्यवसाय बनाया तो किसी ने अन्य स्थानीय संसाधनों और अपनी क्षमता के अनुरूप आजीविका का रास्ता अपनाया।
खेत से बाजार तक बढ़ा महिलाओं का आत्मविश्वास
अम्बिकापुर विकासखंड की कल्पना सिंह इसका उदाहरण हैं। स्व सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने कृषि कार्य के लिए डेढ़ लाख रुपये का ऋण लिया और खीरे की खेती से शुरुआत की। इसके साथ ही वे बैंगन, टमाटर, तरबूज सहित मौसम के अनुरूप विभिन्न सब्जियों और फसलों की खेती करती हैं। कल्पना सिंह के लिए यह बदलाव केवल खेत में फसल उगाने तक सीमित नहीं रहा। पहले घर से बाहर निकलने और लोगों से बातचीत करने में संकोच महसूस करने वाली कल्पना आज बैंकिंग, बाजार और कृषि से जुड़े कार्यों को आत्मविश्वास के साथ स्वयं संभाल रही हैं। उनकी कहानी यह बताती है कि जब महिला को अवसर मिलता है तो वह केवल अपनी आय नहीं बढ़ाती, बल्कि अपने भीतर छिपी क्षमताओं को भी पहचानती है।
मजदूरी से अपने व्यवसाय तक का सफर
उदयपुर विकासखंड के ग्राम सोनतरई की मति बाई की कहानी भी ग्रामीण महिला के संघर्ष और संकल्प की कहानी है। कभी परिवार की आजीविका मजदूरी और छोटे-मोटे कामों पर निर्भर थी। आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने राधा स्व-सहायता समूह का साथ थामा। समूह के माध्यम से तीन लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने मुर्गी पालन का व्यवसाय शुरू किया। मेहनत, निरंतरता और परिवार के सहयोग से यह काम आज उनकी आय का महत्वपूर्ण साधन बन चुका है। मति बाई के अनुसार मुर्गी पालन से उन्हें सालाना लगभग दो से तीन लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है। आज वे स्वयं को पहले से अधिक आत्मनिर्भर महसूस करती हैं। उनके बच्चे भी इस कार्य में हाथ बंटाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद भी मजबूत हुई है।
‘लखपति दीदी’ केवल एक पहचान नहीं, आत्मसम्मान की कहानी है
‘लखपति दीदी’ की पहचान इन महिलाओं के लिए केवल अधिक आय अर्जित करने का प्रमाण नहीं है। यह उस सफर की पहचान है जिसमें उन्होंने अभाव से अवसर, निर्भरता से आत्मनिर्भरता और संकोच से आत्मविश्वास तक की यात्रा तय की है। इन महिलाओं ने यह साबित किया है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की महिला यदि संगठित हो, उसे उचित मार्गदर्शन मिले और अपनी मेहनत लगाने का अवसर मिले, तो वह परिवार की परिस्थितियों को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। आज ऐसी महिलाएं परिवार के खर्च में योगदान दे रही हैं, बच्चों की पढ़ाई और जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर रही हैं और अपने भविष्य के लिए भी बचत कर रही हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब उनकी बात घर के साथ-साथ समाज में भी सुनी जाती है।
बिहान ने खोले आजीविका के अनेक रास्ते
बिहान योजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अपनी रुचि, क्षमता और स्थानीय संसाधनों के अनुरूप अनेक आजीविका गतिविधियां अपना रही हैं। कृषि एवं सब्जी उत्पादन, पशुपालन, मुर्गी पालन, दुग्ध व्यवसाय, छोटे उद्यम, सिलाई, फल विक्रेता और अन्य आयमूलक गतिविधियों के माध्यम से महिलाएं अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। समूह उन्हें केवल आर्थिक सहयोग ही नहीं देता, बल्कि साथ चलने का भरोसा भी देता है। बैठक महिलाओं को एक-दूसरे से सीखने का अवसर देती हैं। प्रशिक्षण से नई जानकारी मिलती है। बैंक और बाजार से जुड़ाव उनके निर्णय लेने का आत्मविश्वास बढ़ाता है। इस तरह बिहान महिलाओं के लिए केवल किसी योजना का नाम नहीं, बल्कि सीखने, जुड़ने, आगे बढ़ने और अपने सपनों को आकार देने का माध्यम बन रहा है। जब महिला आत्मनिर्भर होती है, पूरा परिवार आगे बढ़ता है एक महिला की आय में वृद्धि का असर केवल उसके व्यक्तिगत जीवन तक सीमित नहीं रहता। इससे पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। बच्चों की शिक्षा, बेहतर खान-पान, कुपोषण से मुक्ति, घर की जरूरतों और भविष्य की योजनाओं को पूरा करने में परिवार को सहारा मिलता है। सबसे बड़ा बदलाव महिलाओं की सोच में दिखाई देता है। उन्हें यह विश्वास होने लगता है कि वे भी निर्णय ले सकती हैं, व्यवसाय चला सकती हैं, बैंक जा सकती हैं, बाजार से सौदा कर सकती हैं और अपनी मेहनत की कमाई का उपयोग अपने परिवार के भविष्य को बेहतर बनाने में कर सकती हैं।
संघर्ष से सफलता तक की कहानी
इन महिलाओं की कहानियों में बड़े संसाधनों से अधिक महत्वपूर्ण है छोटे प्रयासों को लगातार जारी रखने का हौसला है। किसी ने कुछ हजार रुपये की बचत से शुरुआत की, किसी ने समूह से ऋण लेकर पहली बार व्यवसाय शुरू किया, किसी ने खेत में नई फसल लगाई और किसी ने पशुपालन या मुर्गी पालन को आय का साधन बनाया। शुरुआत भले ही छोटी रही हो, लेकिन उनके सपने छोटे नहीं थे। आज उनकी मेहनत का परिणाम उनके घर की बदलती तस्वीर में दिखाई देता है। आर्थिक परेशानियों के बीच उम्मीद की किरण दिखाई देती है। बच्चों की आंखों में बेहतर भविष्य के सपने हैं और महिलाओं के चेहरे पर अपने पैरों पर खड़े होने का संतोष।
सशक्त महिला से सशक्त परिवार और सशक्त समाज
बिहान के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं का यह सफर महिला सशक्तिकरण की उस भावना को मजबूत करता है, जिसमें महिला को केवल सहायता प्राप्त करने वाली नहीं, बल्कि अपने परिवार और समाज की आर्थिक प्रगति में सक्रिय भागीदार बनाया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों की सामूहिक शक्ति ने महिलाओं को यह एहसास कराया है कि वे अकेली नहीं हैं। साथ मिलकर बचत करना, सीखना, व्यवसाय करना और आगे बढ़ना संभव है। यही सामूहिकता उनके आत्मविश्वास की सबसे बड़ी ताकत बन रही है। आज जब कोई महिला अपनी मेहनत से आय अर्जित करती है, अपने बच्चों की जरूरतें पूरी करती है और समाज में सम्मान के साथ अपनी पहचान बनाती है, तो उसके साथ पूरा परिवार आगे बढ़ता है। बिहान की यही सबसे बड़ी उपलब्धि है-इसने ग्रामीण महिलाओं के हाथों को केवल काम नहीं दिया, बल्कि उन हाथों को अपने भविष्य की दिशा स्वयं तय करने का साहस दिया है। मति बाई और कल्पना सिंह जैसी महिलाओं की कहानियां यह संदेश देती हैं कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि मेहनत को अवसर, सपनों को दिशा और प्रयास को सहयोग मिल जाए, तो बदलाव अवश्य आता है। आज गांवों में महिलाएं केवल अपने परिवार की खुशहाली की सहभागी नहीं हैं, बल्कि वे अपनी मेहनत से आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। ‘लखपति दीदी’ के रूप में उनकी पहचान उस उज्ज्वल बदलाव का प्रतीक है, जहां महिला की मेहनत परिवार की ताकत और समाज की प्रगति का आधार बन रही है।