कभी टपकती थी छत, आज अपने पक्के घर में सुकून से रहती हैं गंगा आलम प्रधानमंत्री आवास योजना
बीजापुर, 21 सितम्बर 2026/SNS/- बरसात का मौसम आते ही कच्चे मकान की छत से टपकता पानी और घर के भीतर जमा होती नमी, श्रीमती गंगा आलम के परिवार के लिए कई वर्षों तक परेशानी का कारण बनी रही। कृषि मजदूरी कर अपने दो बच्चों का पालन-पोषण करने वाली गंगा आलम के लिए एक सुरक्षित और पक्का घर कभी सपने जैसा था। आज वही सपना हकीकत बन चुका है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले आवास ने उनके जीवन में सुरक्षा, सम्मान और सुकून की नई शुरुआत की है।
संघर्षों के बीच बच्चों की परवरिश
नगरीय क्षेत्र भोपालपटनम के वार्ड क्रमांक 04 निवासी श्रीमती गंगा आलम, पति स्वर्गीय श्री आलम पेंटैया, अपने दो बच्चों के साथ लंबे समय तक एक छोटे से कच्चे मकान में रहती थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित थी और आजीविका के लिए उन्हें कृषि मजदूरी का सहारा लेना पड़ता था।
कच्चे मकान में रहने के दौरान बारिश के दिनों में सबसे ज्यादा परेशानी होती थी। छत से पानी टपकने के साथ ही घर की सुरक्षा और बच्चों को लेकर चिंता बनी रहती थी। कई वर्षों तक इन परिस्थितियों के बीच जीवन गुजारने के बावजूद गंगा आलम ने हिम्मत नहीं छोड़ी।
सरकारी योजना ने दिखाया पक्के घर का रास्ता
वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री आवास योजना के बीएलसी घटक के अंतर्गत ‘मोर जमीन मोर मकान’ योजना की जानकारी नगर पंचायत भोपालपटनम के अधिकारियों एवं प्रधानमंत्री आवास योजना की टीम के माध्यम से गंगा आलम तक पहुंची। योजना की जानकारी मिलने के बाद उनका आवेदन तैयार कराया गया और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर प्रस्ताव शासन को भेजा गया। आवास की स्वीकृति मिलने के बाद गंगा आलम ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद धीरे-धीरे अपने घर का निर्माण कार्य पूरा किया।
मेहनत से पूरा किया सपनों का आशियाना
आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद परिवार का भरण-पोषण करते हुए गंगा आलम ने अपने पक्के मकान का निर्माण पूरा किया। जिस पक्के घर की उन्होंने कभी सपने में भी कल्पना नहीं की थी, आज उसी घर में वे अपने बच्चों के साथ गर्व और खुशी के साथ जीवन बिता रही हैं।
पक्की छत ने केवल उन्हें बारिश और मौसम की परेशानियों से राहत नहीं दी, बल्कि परिवार को सुरक्षित रहने का भरोसा भी दिया है। उनके लिए यह मकान ईंट और सीमेंट से बना घर नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष के बाद मिला सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का आधार है।
गंगा आलम ने जताया आभार
अपने पक्के आवास को लेकर गंगा आलम के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ दिखाई देती है। वे इस बदलाव के लिए नगर पंचायत भोपालपटनम, राज्य शासन एवं प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। गंगा आलम की कहानी यह बताती है कि शासन की योजनाएं जब जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचती हैं, तो उनका असर केवल मकान बनने तक सीमित नहीं रहता। एक पक्का घर परिवार को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य की उम्मीद भी देता है।
संघर्ष से सम्मान तक का सफर
कभी बारिश के दिनों में टपकती छत के नीचे बच्चों के साथ रात गुजारने वाली गंगा आलम आज अपने पक्के घर में चौन की जिंदगी जी रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना उनके लिए सिर्फ एक आवास नहीं, बल्कि वर्षों पुराने सपने के साकार होने की कहानी है।