सेवा की कहानीः आयुष्मान भारत ने साहो को दिया नया सहारागंभीर हृदय रोग का ₹2.53 लाख का इलाज हुआ
बीजापुर, 21 सितम्बर 2026/sns/- कभी बीमारी की चिंता तो कभी महंगे इलाज का डर -भैरमगढ़ विकासखंड के नेलसनार गांव की 22 वर्षीय साहो और उनके परिवार के सामने वर्ष 2025 में ऐसी ही मुश्किल घड़ी आई। सांस फूलने, अत्यधिक थकान और कमजोरी की शिकायत के बाद जांच में साहो को कंजेस्टिव हार्ट फेल्योर की जानकारी मिली। खेती-मजदूरी पर निर्भर परिवार के लिए गंभीर बीमारी का लंबा और महंगा इलाज बड़ी चिंता बन गया था। ऐसे समय में आयुष्मान भारत योजना परिवार के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई।
बीमारी से बढ़ी चिंता, आयुष्मान कार्ड ने दी राहत
साहो के परिवार के पास आयुष्मान भारत कार्ड था। कार्ड के माध्यम से उन्हें बस्तर स्थित एमपीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां जनरल मेडिसिन विभाग में उनका उपचार किया गया। जांच, दवाइयों, अस्पताल में भर्ती और उपचार सहित चिकित्सा संबंधी खर्च योजना के अंतर्गत वहन किया गया। साहो के उपचार में कुल ₹2 लाख 53 हजार की राशि खर्च हुई, जिसका पूरा भुगतान आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत किया गया। परिवार को इलाज के लिए अपनी ओर से कोई राशि खर्च नहीं करनी पड़ी।
स्वस्थ होकर लौटीं घर
समय पर उपचार मिलने के बाद साहो की स्वास्थ्य स्थिति में सुधार हुआ और वे स्वस्थ होकर अपने घर लौट सकीं। महंगे उपचार के बावजूद परिवार पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ा। उन्हें इलाज के लिए कर्ज लेने अथवा जमीन और गहने गिरवी रखने की जरूरत नहीं पड़ी। आज साहो अपने परिवार के साथ सामान्य जीवन जी रही हैं। उनके परिवार के लिए आयुष्मान भारत योजना केवल निःशुल्क उपचार का माध्यम नहीं, बल्कि मुश्किल समय में आर्थिक सुरक्षा और भरोसे का सहारा बनी।
दूरस्थ परिवारों के लिए उम्मीद की किरण
साहो की कहानी बताती है कि गंभीर बीमारी के समय समय पर स्वास्थ्य सुविधा और सरकारी योजनाओं की जानकारी किस तरह परिवार को बड़े आर्थिक संकट से बचा सकती है। आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र परिवारों को निर्धारित पात्रता के अनुसार सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा मिलती है। स्वास्थ्य विभाग ने पात्र नागरिकों से आयुष्मान कार्ड बनवाने और आवश्यकता पड़ने पर समय पर उपचार का लाभ लेने की अपील की है। सेवा की कहानीकृजहां योजना बनी सहारा, उपचार बना राहत और परिवार के चेहरे पर लौटी मुस्कान।