बारिश का पानी सहेजा, खेतों में आई खुशहाली, गीताराम की डबरी बनी अतिरिक्त आमदनी का आधार

जांजगीर-चांपा, 6 अक्टूबर 2026/sns/- जल संरक्षण का सही उपयोग किस तरह ग्रामीण परिवार की आजीविका को नई दिशा दे सकता है, इसकी मिसाल जनपद पंचायत बम्हनीडीह अंतर्गत ग्राम पंचायत खपरीडीह के किसान श्री गीताराम सिदार की कहानी में देखने को मिलती है। उनके खेत में रोजगार गारंटी योजना के माध्यम से निर्मित निजी डबरी आज केवल पानी संग्रहण का साधन नहीं, बल्कि खेती, सब्जी-बाड़ी, फल उत्पादन और मछलीपालन के जरिए अतिरिक्त आमदनी का आधार बन गई है।
श्री गीताराम के खेत में लंबे समय से सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पाता था। बारिश के दौरान पानी बहकर निकल जाता था, जिससे वर्षा के बाद खेती के लिए जल संकट की स्थिति बन जाती थी। इसी बीच उन्हें रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत निजी डबरी निर्माण की जानकारी मिली। ग्राम रोजगार सहायक एवं तकनीकी सहायक से योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने आवश्यक दस्तावेज तैयार कर निजी डबरी निर्माण का प्रस्ताव ग्राम सभा में प्रस्तुत कराया। ग्राम सभा से प्रस्ताव पारित होने के बाद प्रस्ताव जनपद पंचायत के माध्यम से जिला पंचायत भेजा गया, जहां डबरी निर्माण के लिए 2.21 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। स्वीकृति मिलने के बाद श्री गीताराम ने अपने खेत के निचले हिस्से में डबरी निर्माण का कार्य शुरू कराया।
डबरी तैयार होने के बाद बारिश के पानी का संग्रहण होने लगा। धीरे-धीरे यही पानी उनके खेतों की समृद्धि का आधार बन गया। डबरी में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से अब श्री गीताराम को सिंचाई के लिए पहले जैसी परेशानी नहीं होती। उन्होंने धान की पारंपरिक खेती के साथ सब्जी-बाड़ी विकसित की है। खेत और डबरी की मेड़ पर उन्होंने पपीता, केला सहित अन्य फलदार पौधे भी लगाए हैं। इससे उन्हें अलग-अलग मौसम में विभिन्न प्रकार की उपज प्राप्त होने लगी है। इसके साथ ही उन्होंने डबरी में मछलीपालन भी शुरू किया, जिससे खेती के साथ एक अतिरिक्त आय का साधन विकसित हुआ है। श्री गीताराम बताते हैं कि पहले पानी की कमी के कारण खेती में कई तरह की परेशानियां आती थीं, लेकिन डबरी बनने के बाद बारिश के पानी को सहेजकर उसका बेहतर उपयोग करना संभव हुआ है। अब खेती के साथ सब्जी-बाड़ी, फल उत्पादन और मछलीपालन से आमदनी के कई साधन उपलब्ध हैं। परिवार के सदस्य भी इन गतिविधियों में सहयोग करते हैं। इससे प्राप्त आय का उपयोग वे अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में कर रहे हैं।
श्री गीताराम की यह कहानी बताती है कि जल संरक्षण, सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और किसान की मेहनत मिलकर ग्रामीण आजीविका को मजबूत बना सकते हैं। खेत में बनी एक डबरी ने न केवल बारिश के पानी को सहेजा, बल्कि इसी पानी के माध्यम से खेती का विस्तार, सब्जी-बाड़ी, फल उत्पादन और मछलीपालन जैसी गतिविधियों के नए अवसर भी पैदा किए। आज यह डबरी श्री गीताराम के परिवार के लिए जल संरक्षण से समृद्धि की ओर बढ़ते कदमों की पहचान बन गई है।

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