आश्रम-छात्रावासों में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और सुविधाओं

बीजापुर, 07 अक्टूबर 2026/sns/- जिले में संचालित आश्रम एवं छात्रावासों में निवासरत विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण भोजन, बेहतर शिक्षा और सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कलेक्टर श्री विश्वदीप ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में विभागीय आश्रम-छात्रावासों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में कलेक्टर ने अधीक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, भोजन, स्वच्छता और शिक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। जिन भी कन्या आश्रम-छात्रावासों में नगर सैनिक (महिला गार्ड)  की पदस्थापना नहीं हुई है, वहां के अधीक्षक/अधीक्षिका तत्काल इसकी जानकारी उच्च कार्यालय को भेजें ताकि वहां सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। वहीं विभाग द्वारा टेंडर के माध्यम से स्वीकृत निर्माण या अन्य विकास कार्यों को यदि स्थानीय जनप्रतिनिधियों या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा रोकने का प्रयास किया जाता है, तो संबंधित अधीक्षक बिना किसी विलंब के इसकी लिखित सूचना तत्काल प्रेषित करेंगे।

बच्चों का अलग स्वास्थ्य रिकॉर्ड रखें, गंभीर बीमारी की जानकारी पालकों से लें- कलेक्टर ने छात्रावासों में रहने वाले छात्र-छात्राओं की स्वास्थ्य सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी विद्यार्थी को गंभीर बीमारी अथवा पुरानी चिकित्सा संबंधी समस्या है तो उसके पालकों से पूर्व में ही लिखित आवेदन अथवा सहमति प्राप्त कर अलग से स्वास्थ्य रिकॉर्ड संधारित किया जाए। इससे आवश्यकता पड़ने पर बच्चे को समय पर उचित उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।
भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता से कोई समझौता नहीं- 

आश्रम-छात्रावासों की बुनियादी सुविधाओं की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने शौचालयों की साफ-सफाई, टूटे नल एवं उखड़े फर्श जैसी समस्याओं को तत्काल ठीक कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को निर्धारित मेनू के अनुसार पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन दिया जाए। दाल पतली न हो तथा हरी सब्जियों को नियमित रूप से भोजन में शामिल किया जाए। सभी विद्यार्थियों को सेमी-बुनियादी एवं मूलभूत सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाएं। कलेक्टर ने चेतावनी दी कि आगामी निरीक्षण के दौरान किसी संस्था में लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधीक्षक के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
आश्रम-छात्रावासों में विकसित होंगे किचन गार्डन- 

बच्चों को ताजी एवं हरी सब्जियां उपलब्ध कराने के लिए जिन आश्रम-छात्रावास परिसरों में पर्याप्त खाली एवं सुरक्षित स्थान तथा बाउंड्रीवॉल उपलब्ध है, वहां अनिवार्य रूप से किचन गार्डन यानी पोषण वाटिका विकसित करने के निर्देश दिए गए। इससे बच्चों के भोजन में स्थानीय स्तर पर उत्पादित ताजी सब्जियों को शामिल किया जा सकेगा।
दो दिनों में तैयार करें लंबित वन अधिकार मान्यता प्रमाण पत्र- 

वन अधिकार अधिनियम की धारा 3(2) के अंतर्गत जिन आश्रम-छात्रावासों के वन अधिकार मान्यता प्रमाण-पत्र अभी तक तैयार नहीं हुए हैं, उन संस्थाओं के अधीक्षकों को दो दिनों के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेज संबंधित कार्यालय में जमा करने के निर्देश दिए गए।
एक सप्ताह में शत-प्रतिशत आधार और 

APAAR  आईडी का कार्य पूर्ण करें- कलेक्टर ने संस्थाओं में प्रवेशित शत-प्रतिशत विद्यार्थियों के आधार कार्ड एवं 

APAAR  आईडी तैयार कराने पर विशेष जोर दिया। सभी अधीक्षकों को एक सप्ताह के भीतर अपने-अपने छात्रावासों के सभी बच्चों का आधार एवं 

APAAR  आईडी संबंधी कार्य पूर्ण कर प्रमाण-पत्र कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
पालकों के श्रम कार्ड बनवाकर छात्रवृत्ति योजनाओं से जोड़ें- 

छात्रावासों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के पात्र पालकों को आर्थिक सहायता एवं छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए उनके श्रम कार्ड बनवाना सुनिश्चित करने को कहा गया। अधीक्षकों को सात दिनों के भीतर अपने स्तर पर इसकी समीक्षा कर मंडल संयोजकों के माध्यम से प्रगति की जानकारी उच्च कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए गए।
गणित, विज्ञान और अंग्रेजी के लिए विशेष कोचिंग- 

विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए आश्रम-छात्रावासों में विशेष कोचिंग संचालित करने के निर्देश भी दिए गए। विशेष रूप से गणित, विज्ञान और अंग्रेजी विषय के विशेषज्ञों एवं शिक्षकों का पहले से चिन्हांकन कर आवश्यक अध्ययन सामग्री, स्टेशनरी, ब्लैकबोर्ड एवं व्हाइटबोर्ड की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। बच्चों की नियमित पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए उपयुक्त समय-सारणी तैयार करने तथा विशेष कोचिंग के दौरान विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उपस्थिति की साप्ताहिक रिपोर्ट मंडल संयोजक के माध्यम से उच्च कार्यालय को भेजी जाएगी।
खेल सामग्री स्टोर में नहीं, बच्चों के हाथों में दिखनी चाहिए- 

कलेक्टर ने समीक्षा के दौरान आश्रम-छात्रावासों में उपलब्ध खेल सामग्रियों के उपयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेल सामग्री स्टोर रूम में बंद रखने के बजाय विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाए, ताकि बच्चे नियमित रूप से खेल गतिविधियों में भाग ले सकें। कलेक्टर ने सभी मंडल संयोजकों एवं आश्रम-छात्रावास अधीक्षकों को दिए गए निर्देशों का गंभीरता से पालन करते हुए निर्धारित समय-सीमा में कार्रवाई पूर्ण करने तथा पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। बैठक में सीईओ जिला पंचायत श्रीमती नम्रता चौबे, अपर कलेक्टर श्री भूपेन्द्र अग्रवाल, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास सहित सभी विकासखण्डों के मंडल संयोजक तथा आश्रम-छात्रावासों के अधीक्षक एवं अधीक्षिकाएं उपस्थित रहे।

About The Author