प्रशासन की अनूठी पहलरू “बिहान“ की दीदियां बनीं “बीमा सखी“
सुकमा, 10 अक्टुबर 2026/sns/- जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में सुदूर एवं दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन की एक नई इबारत लिखी जा रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के प्रभावी क्रियान्वयन से कोंटा विकासखंड के स्व-सहायता समूहों की महिलाएं अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। प्रशासन के इस संवेदनशील प्रयास के तहत समूह की दीदियों को “एलआईसी बीमा सखी“ के रूप में प्रशिक्षित कर जोड़ा गया है, जिससे उन्हें न केवल घर के पास सम्मानजनक रोजगार मिला है, बल्कि समाज में उनकी एक मजबूत पहचान भी स्थापित हुई है।
भौगोलिक रूप से जटिल और दुर्गम माने जाने वाले कोंटा ब्लॉक के अंदरूनी गांवों तक औपचारिक वित्तीय सेवाएं पहुंचाना लंबे समय से एक बड़ी चुनौती थी। जिला प्रशासन की दूरदर्शी रणनीति ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया। स्थानीय परिवेश और ग्रामीणों की नब्ज समझने वाली “बिहान“ की दीदियां अब सीधे ग्रामीणों के घर-घर पहुंचकर उन्हें जीवन बीमा, बचत के लाभ और भविष्य की सुरक्षा के प्रति जागरूक कर रही हैं। प्रशासन का यह “डोर-टू-डोर“ वित्तीय समावेशन मॉडल अंतिम छोर के परिवारों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में मील का पत्थर साबित हो रहा है।
प्रशासन की इस पहल से जमीनी स्तर पर महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। इंजरम गांव की पूजा कोड़ी अब तक बीमा सखी के रूप में 26,420रू की शानदार आय अर्जित कर चुकी हैं, वहीं एर्राबोर की रूकमणी कर्मा ने भी 11,000रू की कमाई कर परिवार की आजीविका को नई मजबूती दी है। आर्थिक स्वावलंबन के साथ-साथ इन महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अब अपने गांव में वित्तीय सलाहकार बनकर अन्य परिवारों को भी बचत और निवेश का व्यावहारिक मार्गदर्शन दे रही हैं।वर्तमान में कोंटा विकासखंड में 9 सक्रिय बीमा सखियां सफलता की मिसाल पेश कर रही हैं, जिनकी बदौलत सैकड़ों ग्रामीण परिवार बीमा कवच से आच्छादित हो चुके हैं।
इस मॉडल की अपार सफलता को देखते हुए जिला प्रशासन ने चालू वित्तीय वर्ष में बीमा सखियों की संख्या बढ़ाकर 30 करने का लक्ष्य रखा है। सुकमा के अंतिम छोर तक विकास, सुरक्षा और सम्मान पहुंचाने का जिला प्रशासन का यह नवाचार आज बस्तर अंचल में महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक मिसाल बनकर उभरा है।