जनकल्याणकारी योजनाओं से सशक्त हो रहा सरगुजा

अम्बिकापुर, 15 अक्टूबर 2026/sns/-    किसी भी जिले का वास्तविक विकास तब दिखाई देता है, जब शासन की योजनाओं का लाभ आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने लगे। जब आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद विद्यार्थी उच्च शिक्षा की ओर आगे बढ़ें, महिलाएं स्वरोजगार के माध्यम से परिवार की जिम्मेदारी संभालें और उद्यमी उद्योग स्थापित कर दूसरों के लिए रोजगार के अवसर तैयार करें, तब विकास की तस्वीर अधिक व्यापक और सार्थक बनती है। सरगुजा जिले में केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े हितग्राहियों के अनुभव विकास, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की संभावनाओं को सामने ला रहे हैं।

पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना, छात्रवृत्ति, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना और महतारी वंदन योजना जैसी पहलें लोगों को अपनी जरूरतों के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही हैं। इन योजनाओं से आर्थिक सहायता के साथ परिवारों को खर्च कम करने, शिक्षा जारी रखने, स्वरोजगार अपनाने और आय के नए साधन विकसित करने में मदद मिल रही है।

सौर ऊर्जा से बिजली खर्च में राहत, स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहन

बढ़ती बिजली जरूरतों और घरेलू खर्च के बीच सौर ऊर्जा आम उपभोक्ताओं के लिए उपयोगी विकल्प बन रही है। केंद्र सरकार की पीएम सूर्य घरः मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से घरों की छतों पर सोलर सिस्टम स्थापित करने को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अम्बिकापुर के बिलासपुर रोड स्थित मठपारा निवासी पंकज साहू ने योजना का लाभ लेकर अपने घर में तीन किलोवाट क्षमता का सोलर सिस्टम स्थापित कराया है।

पंकज साहू के अनुसार, पहले गर्मी के दिनों में उनके घर का बिजली बिल प्रतिमाह लगभग चार से पांच हजार रुपये तक आता था। बिजली खर्च कम करने के उद्देश्य से उन्होंने योजना के पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया और सोलर सिस्टम लगवाया। इसके लिए उन्हें केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये तथा राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये, कुल एक लाख आठ हजार रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई।
सोलर सिस्टम स्थापित होने के बाद उनके बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आई। कई बार जरूरत से अधिक उत्पादित बिजली ग्रिड में भेजे जाने के कारण उनका बिजली खाता क्रेडिट में भी दिखाई देता है।

छात्रवृत्ति से उच्च शिक्षा की राह हुई आसान
शिक्षा सामाजिक और आर्थिक प्रगति का मजबूत आधार है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को पढ़ाई जारी रखने में सहायता प्रदान करने वाली छात्रवृत्ति योजनाएं उनके शैक्षणिक सफर को आसान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। राजीव गांधी पीजी कॉलेज में बीएससी प्रथम सेमेस्टर के छात्र कृष्णा यादव की कहानी इसी दिशा में एक उदाहरण प्रस्तुत करती है।
कृष्णा के पिता कृषि कार्य कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित आय वाले परिवार के लिए घर की आवश्यकताओं के साथ उच्च शिक्षा से जुड़े खर्चों की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण होता है। किताबें, कॉपी और कॉलेज आने-जाने के खर्च जैसी जरूरतों को पूरा करने में छात्रवृत्ति कृष्णा के लिए सहायक बन रही है।
छात्रवृत्ति से मिलने वाली सहायता उन्हें पढ़ाई से संबंधित आवश्यक सामग्री खरीदने और कॉलेज तक आने-जाने के खर्च में राहत प्रदान करती है। इससे परिवार पर आर्थिक दबाव कम करने में मदद मिलती है और कृष्णा को अपनी शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।

स्वरोजगार से उद्योग स्थापना और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा
किसी भी क्षेत्र की आर्थिक प्रगति में उद्यमिता और रोजगार सृजन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के माध्यम से स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के इच्छुक लोगों को वित्तीय सहायता प्राप्त करने का अवसर मिलता है। अम्बिकापुर की श्रीमती हर्षिता खत्री ने इस योजना के अंतर्गत 25 लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर फर्नीचर निर्माण उद्योग स्थापित किया है।
श्रीमती हर्षिता खत्री श्री साईं इंडस्ट्रीज एंड प्रोडक्ट की प्रोपराइटर हैं, जबकि उनके पति दिलीप खत्री उद्योग के संचालन और प्रबंधन में सहयोग करते हैं। उन्होंने बताया कि स्वयं का व्यवसाय शुरू करने की इच्छा लंबे समय से थी, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण उद्योग स्थापित करना संभव नहीं हो पा रहा था। जिला व्यापार एवं उद्योग कार्यालय से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम की जानकारी मिलने के बाद उनकी पत्नी के नाम से ऋण के लिए आवेदन किया गया। ऋण प्राप्त होने पर फर्नीचर निर्माण इकाई स्थापित की गई।
इस इकाई में पार्टिकल बोर्ड से टेबल, ऑफिस टेबल, ड्रेसिंग टेबल, सोफा, पलंग और अलमारी सहित विभिन्न प्रकार के फर्नीचर उत्पाद तैयार किए जाते हैं। उद्योग की स्थापना से न केवल एक परिवार की आर्थिक गतिविधि बढ़ती है, बल्कि उससे जुड़े कर्मचारियों और उनके परिवारों की आजीविका को भी सहारा मिलता है।

सक्षम योजना से इंदु लता ने बदली परिवार की आर्थिक तस्वीर
महिला सशक्तीकरण का वास्तविक अर्थ महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें अपने परिवार के भविष्य के लिए निर्णय लेने का अवसर प्रदान करना है। छत्तीसगढ़ महिला कोष की सक्षम योजना का लाभ लेकर इंदु लता गुप्ता ने कठिन परिस्थितियों में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया।
पति के निधन के बाद इंदु लता पर अपनी चार बेटियों के पालन-पोषण और शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी आ गई थी। परिवार की नियमित आय का साधन नहीं होने के कारण दैनिक खर्च और बेटियों की पढ़ाई जारी रखना चुनौतीपूर्ण था। इसी दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से उन्हें सक्षम योजना की जानकारी मिली। योजना के अंतर्गत एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त होने पर उन्होंने अपनी ओर से भी राशि जोड़कर दो भैंसें खरीदीं और डेयरी व्यवसाय शुरू किया।
वर्तमान में दोनों भैंसों से प्राप्त दूध की बिक्री से परिवार के भरण-पोषण और बेटियों की शिक्षा में सहायता कर रही है। इंदु लता की एक बेटी मेडिकल कॉलेज में अध्ययनरत है, दूसरी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है, जबकि दो अन्य बेटियां स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद बेटियों की पढ़ाई जारी रखना इंदु लता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

महतारी वंदन योजना से सिलाई कार्य को मिला आर्थिक संबल
परिवार की जिम्मेदारियों के साथ महिलाएं अपने कौशल के माध्यम से आय अर्जित करें, तो इससे घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। सरगुजा जिले की ग्राम पंचायत मेंड्राकला निवासी सरिता तिग्गा इसका उदाहरण हैं। उनके पति सोमसाय तिग्गा मजदूरी करते हैं और परिवार में तीन बच्चे हैं। सीमित आय में परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ बच्चों का पालन-पोषण करना उनके लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
सरिता घर पर सिलाई का काम करती हैं और इस माध्यम से परिवार की आय में योगदान देती हैं। सिलाई कार्य को जारी रखने के लिए उन्हें समय-समय पर धागा और अन्य आवश्यक सामग्री खरीदनी पड़ती है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि का उपयोग वे इन जरूरतों को पूरा करने में करती हैं। सरिता का उदाहरण बताता है कि महिलाओं को मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उनके कौशल और मेहनत को स्वरोजगार से जोड़ने में उपयोगी हो सकती है।
सरगुजा जिले के ये उदाहरण बताते हैं कि जब योजनाओं से मिलने वाली सहायता लोगों की वास्तविक जरूरतों से जुड़ती है, तो वह उनके लिए आगे बढ़ने का आधार बन सकती है। सौर ऊर्जा से घरेलू खर्च में राहत, छात्रवृत्ति से शिक्षा को संबल, उद्यमिता से रोजगार और महिला सशक्तीकरण से परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार-ये सभी प्रयास जिले में आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास की संभावनाओं को मजबूत करते हैं।

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