दोरनापाल में बालिकाओं के अधिकार और सशक्तिकरण का गूंजा संदेश
सुकमा, 15 अक्टुबर 2026/sns/-बालिकाओं के अधिकारों, सम्मान और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग के महिला सशक्तिकरण केंद्र के तत्वावधान में गुरुवार, 15 अक्टूबर को स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय, दोरनापाल में अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य में जागरूकता एवं प्रोत्साहन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बालिकाओं की सामाजिक भूमिका, उनके अधिकारों और सर्वांगीण विकास के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। इस पहल का उद्देश्य बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने, उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने तथा समाज में समान अवसर और सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में सकारात्मक वातावरण तैयार करना रहा।
संवाद, भाषण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया बालिका सशक्तिकरण का संदेश कार्यक्रम के दौरान “बालिका की समाज में भूमिका” विषय पर संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें बालिकाओं के अधिकारों, शिक्षा, विकास और समाज निर्माण में उनकी भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। वहीं, “बेटियां ही भविष्य हैं” विषय पर विद्यार्थियों ने भाषण, परिचर्चा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से बालिकाओं की क्षमता, प्रतिभा और महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। विद्यालय परिसर के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बालिकाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए जागरूकता और समान अवसरों पर जोर कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग के पदाधिकारी, विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। आयोजन के माध्यम से बालिकाओं को सशक्त बनाने, उनके प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव लाने और उनकी शिक्षा एवं विकास को प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया। जिला प्रशासन एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की ऐसी पहलें बालिकाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा उन्हें आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और सक्षम बनाने के प्रयासों को मजबूती प्रदान करती हैं। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि बालिकाओं को समान अवसर, सुरक्षित वातावरण और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर ही एक सशक्त एवं समावेशी समाज का निर्माण किया जा सकता है।