मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शासन के द्वारा 10 बसें संचालित

सुकमा, 02 मार्च 2026/sns/-मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप, बस्तर के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के संकल्प की दिशा में प्रशासन ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। जिला प्रशासन सुकमा द्वारा “मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना“ के तहत आज सुकमा से चित्तलनार मार्ग पर नई बस सेवा का शुभारंभ किया गया।
सुकमा में कनेक्टिविटी का विस्तार
कलेक्टर श्री अमित कुमार के कुशल मार्गदर्शन में शुरू हुई यह बस सेवा जिले की 10वीं बस है। यह बस विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए वरदान साबित होगी जहाँ अब तक सार्वजनिक परिवहन का अभाव था। इस बस के संचालन से झापरा, बुड़दी, कस्तूरी, तालनार, पुसपाल, सौतनार और चित्तलनार गाँवों के ग्रामीणों को सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा जिला प्रशासन के द्वारा 9 रूटों जगदलपुर से कोंटा-2 बस, सुकमा से बड़ेसेट्टी, पुसपाल से छिंदगढ़, गादीरास से ओलेर, दोरनापाल से कात्तापल्ली, मरईगुड़ा से सुकमा और सुकमा से मरईगुड़ा तक मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना के अंतर्गत बस चलाई जा रही है।
जनप्रतिनिधियों ने दिखाई हरी झंडी
इस ऐतिहासिक अवसर पर वरिष्ठ जनप्रतिनिधि श्री धनीराम बारसे, श्री विश्वराज चौहान, नगर पालिका अध्यक्ष श्री हूँगाराम मरकाम और उपाध्यक्ष श्रीमती भुनेश्वरी यादव सहित भाजपा नेताओं ने बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
वरिष्ठ जनप्रतिनिधि श्री धनीराम बारसे ने कहा कि यह बस सेवा सुदूर वनांचल के ग्रामीणों के लिए केवल एक वाहन नहीं, बल्कि जिला मुख्यालय से जुड़ने और विकास के अवसरों तक पहुँचने का एक सेतु है।
कलेक्टर श्री अमित कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के माध्यम से सुकमा के नक्सल प्रभावित और दूरस्थ अंचलों तक जिला मुख्यालय से सीधा जुड़ाव सुनिश्चित हुआ है, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी को एक नया आयाम मिला है। इस योजना के तहत जिले में अब कुल 10 बसें विभिन्न ग्रामीण रूटों पर संचालित हैं, जो न केवल परिवहन नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं बल्कि ग्रामीणों को निजी साधनों की मजबूरी और भारी-भरकम किराए से मुक्ति भी दिला रही हैं।
प्रशासनिक संवेदनशीलता की मिसाल
यह पहल सुकमा जिले के उन अंदरूनी नक्सल प्रभावित इलाकों को राहत प्रदान करेगी जहाँ भौगोलिक विषमताओं के कारण ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब छात्र, किसान और मरीज आसानी से जिला मुख्यालय पहुँच सकेंगे। प्रशासन का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि सरकार की योजनाएँ अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँच रही हैं।

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